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शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

आज की बारिश और आज का मेरा दिन enjoy with rain

आज की बारिश और आज का मेरा दिन 

आज बारिश की वजह से मोहल्ले में पानी भर गया तब उस पानी की धारा को देखकर बचपन के वह लम्हे याद या गए, जब इन्ही धारा में हम कागज की नाव बनाकर छोड़ा करते थे, हर घर से कम से 10 से 20 नाव छोड़ी जाती थी और जहां पर पानी रुकता था वहां पर कागज की ढेर हो जाती थी,



आज वही मोहल्ला वही बारिश वही पानी की धारा थी but नाव एक भी नही, इस घटना को देखकर बरसो पहले सुनी एक poem की दो आधी अधूरी पंक्ति याद गई कि.....


आज कल उदास फिरता है
बारिश में मोहल्ले का पानी,
क्योंकि नाव बनाने वाले...
हाथों ने मोबाइल से रिश्ता जोड़ लिया,


आज जब बारिश की बूंदे खड़की के काँच से छू रही थी तो ऐसा लगा कि बारिश मुझे भीगने बुला रही हो, मैंने अपने पड़ोस के एक बच्चे को आवाज लगाई जो दुसरो के मोबाइल में कुछ देख रहा था मैंने उससे कहा कि चलो बारिश में भीगते है but उसने आने से मना कर दिया, फिर मेरी नज़र उस खिड़की पर गई...

वह बूंदे काँच की खटपटा रही थी...
मैं उनके संग खेलता था कभी...
लेकिन तब मैं छोटा था
औऱ..यह बातें भी छोटी थी
तब घर जल्दी जाने की...किसको पड़ी थी,


बचपन मे जिस पानी मे छपाके लगाते थे...उसमे अब किटाणु दिखने लगे...आज जब बारिश से भरे हुए खड़े देखता हूं तो अपने आपसे सवाल पूछता हूं कि क्या बचपन में मैं ही इन गड्ढों में छलांग लगा लगा कर भीगता था, बचपन में सारे student का एक ही सपना होता है कि यह बारिश जम के बरसे और मुझे छुट्टी मिल जाए but आज बारीश जरा ज्यादा बरसे तो कहर हो जाता है, 


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