सोमवार, 8 अप्रैल 2019

बचपन की कुछ ऐसी बाते जो आज भी हमें हैरान करती है motivational message

बचपन की कुछ ऐसी बाते जो आज भी हमें हैरान करती है motivational message

बचपन की कुछ ऐसी बाते जो आज भी हमें हैरान करती है
बचपन की कुछ ऐसी बाते जो आज भी हमें हैरान करती है

Childhood से ही मुझे छिपकली से बहुत ज्यादा डर लगता है ऐसा क्यों होता है वह मैं आपको last में बताता हूं but फिलहाल कुछ किस्से के बारे में बात करते हैं जो इस छिपकली के पुराण से जुड़े हुए हैं,

Childhood में जब मैं 7th क्लास में था तब मेरे जो classroom की छत थी वह कुछ इस प्रकार थी जो picture में दिखाई दे रही है, मुझे उसका हिंदी या इंग्लिश meaning नही पता, 

Classroom में जहां पर में बैठता था उसके ऊपर कभी कभी छिपकली आ जाती थी मेरे सारे friends को पता था कि मुझे Lizard से बहुत डर लगता था इसलिए जब भी मैं अपनी जगह पर आकर बैठता था तब मैं तो ऊपर नही देखता था because मुझे तो छिपकली से डर लगता था, 

I know कि अगर मैंने गलती से Lizard ऊपर देखी तो मैं किसी भी lecture को ठीक से अटेंड नहीं कर पाऊंगा और class खत्म होने तक डरता रहूंगा but मेरे सारे friends  वह रोज आकर सबसे पहले मेरे ऊपर देखते थे और पता करते थे कि आखिर वहां पर छिपकली है या नहीं है अगर उसे गलती से भी दिख जाती तो मुझे पूरा दिन डराते रहते,

जब मैं अपनी marksheet देखता था तब सोचता था कि maybe इसमें जो 2/ 4 Mark's कम हैं उसका एक कारण वह छिपकली भी है जिसका डर मेरे अंदर है और जिसकी वजह से मैं कुछ lecture को कभी ठीक से attempt नहीं कर पाया, but कोई बात नहीं जो होता है अच्छे के लिए होता है यही सोचकर हम childhood से आज में आते हैं,

आज भी जब भी मैं अपने बाथरुम में नहाने के लिए जाता हूं तो अपने neighbour में एक छोटी सी 3 या 4 साल की बच्ची है जिसे सबसे पहले उस बाथरूम में भेजता हूं और उसे कहता हूं कि चारों तरफ देखो कहीं कोई Lizard तो नहीं है अगर है तो उसके हाथ में एक छोटी सी लकड़ी देता हूं और वह उस Lizard को बाहर निकालती थी उसके बाद में बाथरूम में नहाने के लिए जाता हु, 

एक  बहुत ही अच्छा किस्सा सुनाता हूं जिसे सुनने के बाद maybe आपको पता चल जाएगा कि मैं Lizard से क्यों डरता हूं और जिस किसी को समझ में नहीं आएगा, उसको कोई problem लेने की जरूरत नहीं है because end में में इन सारी बातों को define करने वाला हु,

एक दिन मेरे घर में मेरी नानी आई और तभी मैं नहाने जा रहा था और उसी वक्त मैंने उस छोटी सी बच्ची को कहा कि जाओ बाथरुम में जाकर देखो कोई Lizard तो नहीं है और यह सब कुछ मेरी नानी देख रही थी, तो उसने मुझसे पूछा कि “तुम इतने बड़े होकर Lizard से डरते हो और वह इतनी छोटी हो कर भी Lizard से नहीं डरती तुम्हें तो शर्म आनी चाहिए" 

तब मैंने मेरी नानी से कहा कि “नानी जब मैं छोटा था तब मेरी mother  मुझे यह कहकर सुला देती थी की सो जाओ वरना दीवाल पर जो Lizard है वह तुझे खा जाएगी और यहीं सुन सुन में बड़ा हुआ हु,

यह सुनकर सब लोग हंसने लगे और मैं भी हंसने लगा but ताज्जुब की बात यह है कि मुझे नहीं पता कि childhood में मेरी मां मुझे क्या कहकर सुलाती थी but यह जो dialogue निकला मेरे मुंह से वह suddenly निकला, जिसके बारे में मुझे कुछ पता नहीं but इस बात का हमारी जिंदगी से बहुत बड़ा connection है,

इस बात को सुनने के बाद कुछ लोग मेरे इस ब्लॉग का meaning समझ गए होंगे, और कुछ लोगों जो मेरी तरह नही समझे वह कुछ देर और read करो, बचपन में ऐसी बहुत सारी छोटी छोटी बातें और कुछ hebit होती है जो हमारे in parents हमारे दिमाग में डाल देते हैं, जिसकी वजह से आज भी हम उस काम को करने से डरते हैं, 

Because इस डर का बीज childhood में बोया गया है जिसको जड़ से उखाड़ने में बहुत मेहनत लगती है and बहुत वक्त भी लगता है maybe इसी वजह से कुछ hebit है जिसे आज भी हम नहीं छोड़ पा रहे हैं हर किसी की life में बहुत सारी जंजीरे होती है जो बचपन में हाथों में डाल दी जाती है और आज तक कभी भी हमने उस जंजीरों को तोड़ने की कोशिश नहीं करी, 

आज time है उसको तोड़ने का और उससे भी पहले वक्त है उस जंजीरों के बारे में जानने का कि आखिर ऐसी क्या चीज है जो हमारे दिमाग में डाली गई और आज भी हम उसकी वजह से कभी कुछ नहीं बन पाए, इसलिए आगे कुछ लिखना नहीं चाहता हूं आप खुद सोचिए कि ऐसा क्या है जो बचपन में आपके दिमाग में डाल दिया गया और आज भी आपकी success में रूकावट बन कर आपको आगे बढ़ने से रोक रहा है सिर्फ आप नहीं मैं भी इसकी जड़ तक जाने की कोशिश कर रहा हूं,

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