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मंगलवार, 30 अप्रैल 2019

30/04/2019 आज की कुछ यादगार बातें

30/04/2019 आज की कुछ यादगार बातें 


मेरा एक friend है जो अपने mobile में पूरा दिन games खेलता रहता है उसे games खेलते हुए देखकर में उसे हमेशा एक बार कहता हूं कि “कम से कम मेरे लिए तुम यह games खेलना छोड़ दो, और इसके अलावा कोई ऐसा काम करो जिससे तुम्हें कुछ benifit हो" but उसने कभी भी मेरी बात नहीं सुनी, फिर भी मैं उससे रोज यही sentence बार-बार कहता रहता था, और इसलिए because उसने कभी भी मुझे पलट कर जवाब दे दिया,

अगर देखा जाए तो games खेलना बुरी बात नहीं है but उन लोगों के लिए जिन लोगों ने अभी तक जिंदगी के इम्तहान में participate नहीं किया है यानी कि वह लोग जो अभी बहुत छोटे हैं जिनके लिए games खेलना सिर्फ कुछ देर का मनोरंजन है, and  उन लोगों के लिए जिन्होंने जिंदगी का इम्तिहान पास कर के अपना नाम बना लिया, यानी कि अपनी एक ऐसी पहचान बना ली जिससे लोग उसे एक successful के तौर पर पहचानते हैं,

इनके middle के जो लोग हैं जो लोग अभी अपनी जिंदगी को बना रहे हैं अगर वह लोग अपना एक मिनिट games में लगा रहे हैं इसका मतलब यह है कि वह लोग अपनी जिंदगी बिगाड़ रहे हैं और इसीलिए मैं उसे एक ही sentence रोज कहता था,

आज मेरा वही friend किसी को suggestion दे रहा था कि तुम अब किसी company में काम करने चले जाओ, तो मैंने उससे पूछा कि “तुम किसे suggestion दे रहे थे" तब उसने कहा कि “मेरे दोस्त है जो मेरे साथ रोज games खेलता है उसको मैं यह suggestion दे रहा था" मैंने उससे पूछा कि “अब तुम्हारे साथ games कैसे खेलेगा" तो उसने मुझसे कहा कि “अब वह पूरा दिन काम करेगा और रात को हमारे साथ games खेलेगा"

फिर मैंने उससे कहा कि “एक काम करो तुम उससे कुछ tips ले लो कि पूरा दिन काम करके रात को games कैसे खेलते हैं अपने टाइम टेबल को किस तरह से manage करें ताकि हम रोज रात को games खेल सके" तब मेरे दोस्त ने मुझसे कहा कि “ऐसा क्यों" मैंने उससे कहा की “एक दिन तुम्हारी भी यही हालत होने वाली है" तभी उसने मुझे पलट के जवाब दिया की “जो भी हो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता and मुझे जो जी में आएगा वही मैं करूंगा"

यह सुनने के बाद मेरी आवाज चली गई and मैं कुछ देर के लिए meditate में चला गया और कुछ देर खामोश रहने के बाद मुझे एक जवाब मिला, और वह जवाब यह था कि मेरी एक duty थी कि मैं उसको सही रास्ते में लाने की कोशिश करूं और वह मैंने अच्छी तरह से निभाई but अब वक्त आ गया था कि मैं उस duty को छोड़ दु,

मेरे अंदर से एक आवाज आए कि अपने friend से बातें करना नहीं छोड़ना है बस आज से वह सारी बातें छोड़ देनी है जो कल तक करता आया था and कल तक जिन बातों को मैं उनके सामने रखकर अपना ही वक़्त बर्बाद कर रहा था,

उन लोगों से कम बातें कीजिए जो आपकी अच्छी बातों को नजरअंदाज करते है

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