गुरुवार, 14 मार्च 2019

choose only one direction in your life अपने जीवन में केवल एक दिशा चुनें

choose only one direction in your life

choose only one direction in your life
choose only one direction in your life

कुछ time पहले मेरे अंदर एक बहुत ही bed thinking आ गई थी उसे मैं bed  तो नहीं कह सकता but मेरे आनेवाले future के लिए वह बहुत harmful थी, 

Exully हुआ ये था कि मैं अपने friends को देख कर उसके अंदर जो skills है उस skills को भी में सीखने की कोशिश करने लगा, मैं चाहता था कि मुझे सब कुछ आए, मैं वह सब कुछ सीख सकूं जो मेरे सारे friends को आता है मतलब की उसके साथ communicate करते time भी उसके उसके पास जितने knowledge है उतना knowledge मेरे पास हो,

Because मैं डरता था इस बात से कि किसी दिन वह मुझे यह ना कह दे कि क्या तुम्हें इस चीज के बारे में knowledge है, क्या तुम यह कर सकते हो जो मैं कर सकता हूं that's because में अपना direction  मिस करता जा रहा था,

मैं सोच रहा था कि कहीं किसी जगह से मुझे ऐसी knowledge मिल जाए, जिस knowledge की बदौलत में सिर्फ अपनी direction पर work करूं, मैं सिर्फ अपने goal को archive करने की कोशिश करू और जो कुछ भी मुझे नहीं सीखना चाहिए उसे छोड़ दु, फिर चाहे भले मेरा friends या मेरा कोई raletive मुझे आकर कहे कि तेरे पास इस चीज को लेकर knowledge नहीं है,

आज जब मैंने mahabharat का एक बहुत ही अच्छा किस्सा सुना, जो मैने पहले भी कई बार सुना था but उस वक़्त शायद में इतना mature नही था इस लिए में समझने में सक्षम नही था लेकिन आज जब मैंने वह किस्सा सुना तब सारे doubt clear हो गए,

बात उस time की है जब द्रोणाचार्य ने पांडवों और कौरवों को शिक्षा देने की शुरुआत की थी, सबसे पहले उसने यह खोजने की कोशिस की इनमें से कौन ऐसा है जो धनुर्विद्या में सक्षम है, इसलिए वह सा छात्रों को एक पेड़ के नीचे ले गए और सब से कहा कि सामने जो पेड़ है उसमें एक चिड़िया है आप सब लोगों को उस चिड़िया की आंख पर निशान लगाना है,

सबसे पहले द्रोणाचार्य ने दुर्योधन को अपने पास बुलाया, और कहा...

द्रोणाचार्य :- देखो उस पेड़ की ओर और बताओ मुझे कि तुम्हें क्या दिख रहा है, 

दुर्योधन :- गुरु जी मुझे पेड़ दिख रहा है और चिड़िया देख रही है आकाश भी दिख रहा है,

द्रोणाचार्य :-  और तुम्हें क्या दिख रहा है, 

दुर्योधन :- और मुझे वृक्ष की पत्तियां दिखाई दे रही है,

द्रोणाचार्य :- बहुत अच्छा...! वहाँ पर खड़े हो जाओ,

फिर द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर को बुलाया,

द्रोणाचार्य :- उठाव धनुष और बनाव युधिष्ठिर तुम्हें क्या दिखाई दे रहा है,

युधिष्ठिर :- गुरु जी मुझे चिड़िया दिखाई दे रही है उसके पंख दिखाई दे रहे है उसकी आंखें दिखाई दे रही हैं,

द्रोणाचार्य :- और क्या दिखाई दे रहा है, 

युधिष्ठिर :- मुझे पेड़ भी दिखाई दे रहा है गुरुजी,

द्रोणाचार्य :- बहुत बढ़िया....! वहाँ पर खड़े हो जाओ,

उसके बाद नकुल और सहदेव आये और लास्ट में कौन आया.............? कौन आया........Last में............? मैं आप सबसे पूछ रहा हु जो यह पढ़ रहे है, अब maybe अपने सोच लिया होगा औऱ आपका answer होगा......अर्जुन, but sorry friend's उसके बाद आया भीम, 

द्रोणाचार्य :-  बोलों भीम तुम्हें क्या दिखाई दे रहा है,

भीम :-  गुरुजी मुझे आम दिखाई दे रहे है,

द्रोणाचार्य :- और क्या दिखाई दे रहा है भीम,

भीम :-  मुझे बहुत सारे आम दिखाई दे रहे हैं गुरुजी, 

द्रोणाचार्य :- क्या तुम्हें चिड़िया की आंख नहीं दिखाई दे रही है भीम,

भीम :-  माफ कीजिए गुरु जी मुझे तो चिड़िया ही नहीं दिखाई दे रही हैं,

और finally अब last में आया अर्जुन, 

द्रोणाचार्य :- अर्जुन तुम्हें क्या दिखाई दे रहा है,  

अर्जुन :- गुरुजी मुझे चिड़िया की आंख दिखाई दे रही है, 

द्रोणाचार्य :- और........, 

अर्जुन :- मुझे चिड़िया की आँख दिखाई दे रही है,  

द्रोणाचार्य :- मैं तुम्हारा गुरु, क्या तुम्हें मैं नहीं दिखाई दे रहा हूं,

अर्जुन :- क्षमा कीजिए गुरुजी लेकिन मुझे चिड़िया की आंख के अलावा और कुछ नहीं दिखाई दे रहा है,

finally अब मैंने सिर्फ अपने डायरेक्शन पर जाने का सोच लिया है और मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कुछ ऐसी चीज है जो मेरे दोस्तों को आती है और मुझे नहीं आती मेरे रिलेटिव को पता है और मुझे नहीं पता और मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई मेरे सामने ऐसे सब्जेक्ट को लेकर मुझ से बातें करें जो मुझे नहीं पता और मैं मुस्कुरा कर उनसे कहूंगा आप के एम सॉरी आई डोंट नो,

0 comments: