सोमवार, 18 मार्च 2019

परिस्थिति नही अपनी मनःस्थिति को बदले change your mindset not circumstances

परिस्थिति नही अपनी मनःस्थिति को बदले change your mindset not circumstances


आजकल के people की आधी से ज्यादा problem परिस्थितियों को लेकर है, हर बार परिस्थिति को लेकर हम बार-बार excuse दिया करते हैं, कुछ people कहते हैं कि मेरे पास यह नहीं था इसलिए मैं यह नहीं कर पाया, मेरी circumstances अच्छी नहीं थी इसलिए मैं वो नहीं कर पाया, न जाने कैसे-कैसे excuse हम सिर्फ एक परिस्थिति के नाम पर लोगों को दिया करते हैं,

इसका सबसे बड़ा reason यह है कि हम वह देखते हैं जो सामने वाले के पास है हमने कभी मुड़कर अपनी और देखा ही नहीं कि आखिर हमारे पास क्या है, एक बार अगर हमने देख लिया होता तो maybe हम किसी को circumstances के नाम पर excuse कभी नहीं देते,

वैसे यह लोगों की problem है इसलिए मेरी भी problem है because मैं भी लोगों में ही आता हूं, और कल तक ये मेरी भी यही problem थी, आपने अगर गौर से read किया तो मैंने कहा कि कल तक ये मेरी भी यही problem थी “कल तक आज नही"

परिस्थिति नही अपनी मनःस्थिति को बदले change your mindset not circumstances

परिस्थिति नही अपनी मनःस्थिति को बदले change your mindset not circumstances
परिस्थिति नही अपनी मनःस्थिति को बदले change your mindset not circumstances


आज ऐसा क्या हुआ जो मैंने circumstances को लेकर excuse देना छोड़ दिया, maybe आप लोगों ने यह image देख लिया होगा इसलिए आप लोगों को समझ में आ गया होगा कि मैंने क्यों छोड़ दिया,

but मैं फिर भी इस दो lines पर कुछ बातें यहां पर जरूर करना चाहूंगा because मैं चाहता हूं कि मैं इस दो lines को थोड़ा Detailed करके अपने आप को समझाने की कोशिश करू और उन people को समझाने की कोशिश करू, जो maybe इन दो लाइनों को ठीक से समझ ना पाए हो,

मैंने starting में ही बात की थी कि ऐसा बहुत कुछ है हमारे पास, जो दूसरों के पास नहीं है, लेकिन बजाएं हम अपने skills की तारीफ करने से ज्यादा हम दूसरों की निंदा करने में लग जाते हैं, ऐसा क्यों होता है उसका तो कोई scientific reason नहीं है लेकिन यह बहुत गलत होता है, हा में मानता हूं कि हमें दूसरों की तारीफ करनी चाहिए but सिर्फ तारीफ़ करे, हम उनके जैसे क्यों बने अगर हम उसके जैसे बनने लगे तो हमारे अस्तित्व क्या ? कभी सोचा है,

मुझे लगता है कि मैं मुद्दे से थोड़ा भटक चुका हूं हम बात कर रहे हैं circumstances की, मैं कुछ questions पूछना चाहता हूं उन लोगों से जो कहते हैं कि हम circumstances के वजह से आगे नहीं बढ़ पाते हैं और यही सवाल मैंने खुद से भी पूछे थे और मुझे जवाब मिले जो सच में बहुत ही सोचने वाले थे,


परिस्थिति नही अपनी मनःस्थिति को बदले change your mindset not circumstances


Questions ये  थे कि क्या आप को 2 time का खाना नहीं मिलता, क्या आप के ऊपर रहने के लिए छत नहीं है, क्या आपके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं है क्या आपके पास अपना गम बांटने के लिए कुछ friends और कोई family members नहीं है,

अगर इतना कुछ भी नहीं है तो सोचिए कि क्या आपकी सांसे आपके पास नहीं है, क्या आप जिस इस earth में रह रहे उसने घूमना छोड़ दिया है, क्या आप जिस माहौल में रह रहे हैं वहां पर oxygen का आना बंद हो गया है, क्या आपके खुद के हाथ पैर और आपके दिमाग ने काम करना छोड़ दिया है,

I know कि मैंने जिस जिस चीज की बात यहां कही है यहां पर वह सब कुछ आपके पास है, अगर इनमें से एक चीज भी आपके पास नहीं होती तो maybe आप यहां पर इसे read नहीं कर रहे होते, फिर किस circumstances की बात आप यहां पर कर रहे हैं, मै और आप


Because परिस्थिति तो तब गंभीर होती जब इनमें से अगर कुछ भी आपके पास नहीं होता, मैंने सालों पहले इस परिस्थिति को लेकर यह बहुत अच्छा article पढ़ा था but बुरी बात यह है कि मैंने दिमाग से वह निकल गया है, आज मुझे बहुत दुख हो रहा है कि मेरे पास उस article की चंद लाइनें भी नहीं है आप लोगों को बताने के लिए और खुद को भी बताने के लिए, अगर होती तो maybe मैं आपको और खुद को बहुत ही अच्छी तरह से इस topic को समझा सकता था,

कहने की बात यह है कि जब भी कुछ करने की try करें तो यह सोचकर करें कि मेरे पास सब कुछ है, मुझे कुछ भी नहीं चाहिए और फिर बिना किसी फल के आशा के साथ अगर आप कुछ work करते हैं तो फ़ल अपने आप मिलना है,

कुछ लोग सोचेंगे कि अगर हमने ऐसा सोच लिया कि हमारे पास सब कुछ है तो हम कुछ भी क्यों करेंगे, वह इसलिए because हमें सीखना कभी भी बंद नहीं करना चाहिए और यह बात मैं पहले भी बहुत बार कह चुका हूं, और मैं भी यहां पर रोज आकर अपने knowledge इसलिए शेयर करता हूं because मैंने ना ही कल learning बंद की थी और ना ही मैं कल learning बंद करूंगा,


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