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गुरुवार, 28 मार्च 2019

यह कलयुग कहां से शुरू हुआ था और कहां जाकर खत्म होगा important thing

यह कलयुग कहां से शुरू हुआ था और कहां जाकर खत्म होगा

यह कलयुग कहां से शुरू हुआ था और कहां जाकर खत्म होगा
यह कलयुग कहां से शुरू हुआ था और कहां जाकर खत्म होगा

आज हर इंसान किसी पराई  woman को देखता है तो उसके Brain में दुष्ट विचार ही आते है, अपने ही लोगो की Success से भी जलन होती है, दुसरो को Happy देखकर रात को नींद नही आती,  

कभी कभी किसी से Question पूछता हूं कि ऐसा क्यों होता है तो सब यही कहते हैं कि brother ये कल युग चल रहा है, में इस Question का answer में खोजना चाहता था, Question यह था कि आखिर इस कलयुग का मतलब क्या है आखिर ये कलयुग कहां से start हुआ है और कहां पर जाकर Finish होगा, यह Question हमेशा मेरे दिमाग में घूमता रहता है,


यह कलयुग कहां से शुरू हुआ था और कहां जाकर खत्म होगा,


एक इंसान का blog मैं पढ़ रहा था उसमें लिखा था कि कहीं साल पहले जब time अच्छा हुआ करता था, उस time उसके घर पर एक पराई स्त्री किसी कारणवश रात गुजारने के लिए रात को आई थी, पूरी रात उसने उस इंसान के साथ बिताए और morning होते ही वहां से चली गई,

surprise की बात यह थी उस इंसान ने लिखा था कि वह पराई औरत मेरे साथ पूरी रात रही but मेरे दिमाग में एक भी बुरा ख्याल नहीं आया लेकिन आज किसी पराई औरत को देखता हूं तो न जाने क्यों मेरे brain में बुरे बुरे ख्याल आने शुरू हो ही जाते है, आज जब उस night को याद करता हु तो सोचता हूं कि That was me,

Last में उस इंसान ने लिखा था कि बहुत सोचने के बाद मुझे पता चला कि बहुत साल पहले जमाना अच्छा हुआ करता था and now-a-days जमाना इतना बिगड़ गया है जिसकी हम imagination तक नहीं कर सकते इसीलिए हमारे Brain में बुरे ख्याल आते हैं, 

मुझे यह बात कुछ हद तक पता चली but मुझे इसकी जड़ पता नहीं चली की आखिर आज के जमाने में ऐसा क्या है जो हर इंसान इतनी बुरी Thought के साथ चलता है, क्यों लोग चाहकर भी अपने Thought को बदल नहीं सकते ऐसा क्या है इस कलयुग में लोग बिना सोचे बुरी सोच में डूब जाते हैं,


यह कलयुग कहां से शुरू हुआ था और कहां जाकर खत्म होगा


जब मैंने Ramayana की एक कल्पित घटना से जुड़ी एक छोटी सी बात सुनी, पता नहीं maybe वह सच्ची या फिर कल्पित होगी, उस विषय पर मुझे कुछ पता नहीं है, पता है तो बस इतना कि उस छोटी सी story को सुनने के बाद मुझे बहुत सारे Questions के answer मिल गए,

बात उस time की है जब Ravana ने सीता का अपहरण (Kidnapping) किया था और अपने लंका में लेकर आया था, Ravana सीता को समझा समझा कर थक चुका था कि उसे अपना स्वामी Accept कर ले, but सीता ने कभी भी उसे अपना स्वामी Accept नहीं किया,

एक night मंदोदरी ने Ravana से कहा कि अगर सीता आपके पास नहीं आ रही है तो क्यों ना आप RAM का रूप धारण करके सीता के पास जाए, जब Ravana ने कहा कि मैंने बहुत बार इसका प्रयास किया, तब मंदोदरी ने कहा कि “फिर क्या हुआ" Ravana ने कहा की जब भी में RAM का रूप धारण करता हूं और सीता के सामने जाने की कोशिश करता हु तो मुझे world की सारी स्त्रियां माता और देवी के रूप में दिखाई देती है,

इतनी छोटी सी बात को Listening के बाद मुझे ऐसा पता चला कि सारा खेल Thought का है, संदीप महेश्वरी कहा करते हैं कि सारा खेल believe का है बहुत जल्द में संदीप महेश्वरी की यह बात पर आप तक पहुंचाने की कोशिश करूंगा, but फिलहाल में उसमें थोड़ा और add करके यह बताना चाहता हूं कि सारा खेल Thought का है, अगर सोच बदल गई then सब कुछ  बदल गया, और इसी Thought की वजह से आज का हर व्यक्ति बुरे ख्यालों में उलझा हुआ,

मैं तो इस कलयुग की बुरी Thought से मुक्त होने की कोशिश कर रहा हूं आप भी हो सके तो try करना और अपने आप को कुछ हद तक राम के जैसा बनाने की try करना यकीन मानिए अगर सोच कर कि बदल जाएगी,

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