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रविवार, 27 जनवरी 2019

जिद्दी आदमी ही इतिहास रचता है The stubborn man only makes history


जिद्दी आदमी ही इतिहास रचता है The stubborn man only makes history

जिद्दी आदमी ही इतिहास रचता है The stubborn man only makes history
जिद्दी आदमी ही इतिहास रचता है

दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक वह लोग जो इतिहास रटना चाहते हैं और दूसरे वह लोग जो इतिहास रचना चाहते हैं इन दोनों में फर्क सिर्फ इतना है की इतिहास वही रचता है जिसके अंदर कोई जिद्द आ गई हो , केवल जिद्दी आदमी ही इतिहास रचता है ,

आज जिन जिन लोगों ने इतिहास रचा है उसके अंदर कभी ना कभी कोई जिद्द आ गई थी उसी जिद के कारण उसने इतिहास रचा है , बिना किसी एग्जांपल की कोई कुछ समझ नहीं पाता मैं भी कुछ नहीं समझ सकता इसलिए मैं आज आपको कुछ ऐसे एग्जांपल दुगा  जिसने अपनी एक जिद्द को पाला और जिंदगी में सफलता को हासिल किया ,

दशरथ मांझी को तो आप सब लोग जानते ही होगे कुछ लोग शायद उन्हें नहीं जानते होगे इसलिए उसकी एक छोटी जिद्द जिसकी वजह से उसने इतिहास रचा है उसके चंद लाइने आपके सामने पेश करता हूं ,
जिद्दी आदमी ही इतिहास रचता है The stubborn man only makes history
जिद्दी आदमी ही इतिहास रचता है

दशरथ मांझी की पत्नी बीमार हो गई थी , बहुत पुरानी बात है उस वक्त जैसे आजकल अस्पताल और सब कुछ हमे अपने दायरे में मिल जाता  है लेकिन तब नहीं मिलता था तब उसको अस्पताल जाने के लिए  चलकर एक पहाड़ की छोटी के किनारे चल कर जाना पड़ता था तकरीबन 1 दिन लगता था उस पहाड़ को पार करने में , 

इसी वजह से वह अपनी पत्नी को बचा नहीं पाए और यही बात उनके दिल को लग गई उसके अंदर यह जिद्द आ गई कि वह इस पहाड़ के बीच में से एक रास्ता बनाएगा उसने अकेले ही एक छैनी और हथौड़ी के साथ उस पहाड़ के बीच में से एक रास्ता बना दिया जिस को बनाने में उसको तकरीबन 22 साल लग गये , 

हमारे महात्मा गांधी जिसको ट्रेन से पहले दर्जे में से निकाल दिया गया था उसको बोला गया था कि तुम को हक नहीं है कि तुम इसके अंदर आकर बैठो , उसने अपने क्रोध को पाला अपना क्रोध उसने किसी के सामने बयां नहीं किया व्यर्थ नहीं उसके पास टिकट थी फिर भी उसने अपना यह क्रोध पाला अपनी इस जिद्द को पाला और उसी जिद के साथ देश को आजादी दिलाई , 

इतिहास रटना नही रचना है 


आज जिस किसी ने भी इतिहास रचा है ना उसको किसी ना किसी दिन गुस्सा आया था उसी गुस्से को उसने पाला और इतिहास रच डाला , 

रतन टाटा जब बिल फोर्ड के पास गए थे अपने टाटा मोटर व्हीकल को बेचने तब बिल फोर्ड ने भी उसकी बेइज्जती की थी उस दिन से रतन टाटा ने दिन रात एक कि उसने अपनी उस बेज्जती को पाला और वक्त बदल गया , 

कुछ दिन के बाद टाटा मोटर्स आगे निकल गई और बिल फोर्ड की कंपनी निचे गिर गई , तब टाटा ग्रुप में प्रपोजल भेजा कि हम तुम्हें खरीद लेते हैं , उस वक्त टाटा मोटर्स की पूरी टीम मुंबई से डेट्रॉइट गई थी इस बार डेट्रॉइट से पूरी टीम मुंबई गई , दोस्तों एक जिद्द ही इतिहास रच सकती है , 

और भी बहुत सारे लोगों की महागाथा मेरे पास है लेकिन सबके अभी दिमाग में नहीं है जैसे जैसे याद आती जाएगी वैसे वैसे मैं आप सबके साथ शेयर करता रहूंगा क्यों कि ना ही मैं यहां से जाने वाला हूं और ना ही आप यहां से जाने वाले हैं और बातें तो चलती ही रहनी है , 

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