Search here

सोमवार, 21 जनवरी 2019

बचपन की कुछ मजेदार घटनाएं some funny incidents of Childhood


बचपन की कुछ मजेदार घटनाएं some funny incidents of Childhood

बचपन की कुछ मजेदार घटनाएं some funny incidents of Childhood
बचपन की कुछ मजेदार घटनाएं

बचपन से ही में हॉस्टल में पढ़ता था अक्सर बच्चे बोर्डिंग स्कूल में न जाने की जिद करते है पर मैंने अपने कुछ फैमिली मेंबर की बातें सुनकर बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने की जिद की , उस छोटी सी जिद की वजह से आज भी में बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता हूं मेरे तकरीबन 15 साल हो गए बोर्डिंग स्कूल में , लेकिन मेरी शुरुआत  के 1 से 7 कक्षा की जो बोर्डिंग स्कूल में जिंदगी रही वह बहुत ही भयानक थी उसीमे से कुछ किस्से सुनाता हु ,

आप लोग मानोगे नही मेरी बात फिर भी शरुआत उसी बात से करता हु , दूसरी कक्षा के बच्चे ज्यादा से ज्यादा कितना सिख सकते है , 1) 1 से 100 तक के अंक , 2) ABCD , 3) कुछ नाम और कुछ स्पेलिंग्स , लेकिन जब में दूसरी कक्षा में था तब मुजे 1 से 30 तक के जो पहाड़े होते है उसमे से 23 तक पहाड़ा आ गया था जो बच्चे 4 या 6 कक्षा में जाकर शिखते है लेकिन इसके पीछे एक मजेदार कहानी है

जब में दूसरी कक्षा में था तब सातवी कक्षा की बहुत सारी लड़कियां मुझे बच्चा समझ कर मेरे साथ खेलने आया करती थी और मैं भी उसके साथ खेलता था उस वक्त दूसरी कक्षा में मेरे अलावा और कोई भी स्टूडेंट नहीं था ज्यादातर मां बाप अपने बेटे को पांचवी कक्षा के बाद ही बोर्डिंग स्कूल भेजते हैं इसलिए मेरे अलावा और कोई नहीं था इसलिए वह सारी लड़कियां मेरे साथ बातें करती और रोज मुझे कुछ नया सिखाती जैसे आज में आप सब को किछ नया सीखने की कोशिश करता हु ,

एक दिन उन्होंने मुझे कहा कि अगर तुम रोज एक पहाड़ा याद करके आवोगे तो में तुम्हे एक पप्पी दूँगी , उस वक्त भले ही प्यार व्यार के बारे में कुछ पता न चलता हो लेकिन अच्छा लगता था, उसी एक पप्पी की लालसा में मैं रोज एक पहाड़ा याद करके आता था कभी-कभी दो पहाड़े याद करके आता था एक दिन तो पूरी रात जगके मैंने 5 पहाड़े याद किए थे बस दोस्तों यही कारण था की दूसरी कक्षा में होते हुए भी मुझे इतने सारे पहाड़े याद हो गए , जब मेरी दूसरी कक्षा खत्म हो गई तब वह लड़कियां भी दूसरे स्कूल में चली गए क्योंकि वह बोडिंग स्कूल सिर्फ सातवी कक्षा तक ही था ,

कभी-कभी सोचता हूं कि अगर वह लड़कियां मेरे साथ और कुछ साल रही होती तो मैंने पांचवी कक्षा में आकर  ही यूपीएससी क्लियर कर लेता ,

बचपन की कहानियां Childhood stories

दूसरा हादसा कुछ ऐसा हुआ था जो वाकई बहुत ही फनी था , जैसे कि आप सबको पता है कि छोटे बच्चे अपने शिक्षक की बातें हमेशा आदर पूर्वक मानते हैं इसलिए एक बार हमारी एक टीचर ने कहा की ठंड सहन करने से हमारी हड्डियां मजबूत होती है और यह बात मेरे और मेरे सारे दोस्तों के दिमाग में बस गई ,

उस वक्त शायद में चौथी या पांचवीं कक्षा में था जब हमने यह बातें सुनी तो सर्दियों का मौसम था जोरो से ठंड पड़ रही थी लेकिन क्या करें बच्चे थे इसलिए टीचर की बात को अनसुना ना करते हुए हम सारे दोस्त पुरी सर्दियों के सीजन में रोज सिर्फ चड्डी पहन कर सोते थे और ताज्जुब की बात तो यह है दोस्तों की हम लोग नीचे सोते थे वहां पर भी हम कुछ बिछाते नहीं थे ,

अक्सर लोग सुबह उठकर एक्सरसाइज करते हैं लेकिन हम तो बच्चे थे इसलिए ज्यादा समझ थी नही ,  हम लोग जब रात को सब लोग सो जाते थे तब PT की बुक निकालकर उसमें से योगा करते थे ,

हमारे रसोई घर के बाहर एक पाइप था जहां पर लटक कर हम लोग पुशअप लगाते थे जब यह बात हमारे सर को पता चली तब हमारे सर ने हमें इतना पीटा कि मेरे एक दोस्त को तो फीवर हो गया तब मुझे पता नहीं चला की सिर ने हमे इतना क्यों पीटा था ललेकिन आज मुझे पता चला कि जिस पर लटक कर हम लोग पुश उप करते थे वो पाइप गैस का था ,

बचपन की शरारत Childhood mischief


यह सारे किस्से तो मजेदार थे लेकिन एक आश्चर्यजनक किस्सा था जिसके बारे में आज भी अगर मैं सोचता हूं तो मेरा दिमाग सुन पड़ जाता है अगर आप में से किसी को इस किस्से के बारे में कोई आईडिया हो तो मुझे जरूर शेयर कीजिएगा क्योंकि बचपन से मैं इसके सवाल का जवाब ढूंढ रहा हूं

जैसे कि आप सब लोग को पता है कि हर इंसान की 1 दुखती नस होती हैं वैसे ही जब मैं चौथी क्लास में था तब मेरा एक दोस्त था अश्विन उसकी एक दुखती नस मेरे पास थीं जिसके चलते मैं उससे अपने सारे काम करवाता था रोज में उसे उस बात की धमकी दे देकर अपने सारे काम करवाता था उसको अपना दोस्त नहीं लेकिन चेला बना कर रखता था ,

बचपन से ही मैं उस हॉस्टल में था इसलिए तीसरी और चौथी कक्षा का मॉनिटर में था , एक दिन अचानक मैंने अश्विन को कुछ काम करने के लिए कहा लेकिन उसने सबके सामने मुझे मना कर दिया और मुझे बहुत गुस्सा आ गया और मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हारी वह बात सबको बता दूंगा ,

उसने सबके सामने मुझे कहा कि बता दो मुझे कोई डर नहीं है मैंने कुछ देर सोचा और फिर पानी पीने बाद चला गया वो जब वापस आया तब एकदम से मैंने सबको बता दिया कि अश्विन अलका से प्यार करता है और वह अलका और कोई नही सातवी कक्षा में पढ़ती एक लड़की थी ,

जब यह बात पूरी बोर्डिंग स्कूल को पता चल गई और अलका को भी पता चल गई तब अलका पूरे ढाई दिन तक रोते रही अब आप लोग बताओ दोस्तों एक चौथी क्लास का छोटा सा बच्चा एक सातवीं क्लास की लड़की से प्यार करता है तो इसमें रोना किसे चाहिए उस लड़के को लेकिन आज भी मैं सोचता हूं कि अलका इतने दिन तो क्यों रोई थी क्या आप लोगों के पास इसका जवाब है

बाते बहुत सारी है लेकिन यहां पर इतनी ही करते है आशा करता हु आप बोर नही हुए होंगे , और मुजे मेरे सवाल का जवाब भी दे सके 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Share your experience with me