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सोमवार, 7 जनवरी 2019

मदद करना सचमें आसान है motivational story

Motivational story :- this is small motivational story This motivational story will teach you to help others

मदद करना सचमें आसान है motivational story 

मदद करना सचमें आसान है motivational story
मदद करना सचमें आसान है motivational story 


हम सब में से बहुत सारे लोग ऐसे होंगे जो दूसरों की मदद करना चाहते होंगे मगर यह सोचकर वह खामोस हो जाते हैं कि हमारे पास इतने पैसे कहां कि हम दूसरों की मदद कर सके , जब भी हम किसी लाचार बेबस इंसान को देखते हैं तब दिल करता है कि अपने पास जो कुछ भी है वह उसे दे दे मगर जज्बात के साथ जिंदगी नहीं जी सकते ,

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बहुत जल्द भावनाओं में बह जाते हैं किसी जगह अगर कोई अत्याचार या हिंसा हो रही है उस वक्त वह कुछ कर नहीं पाते ओर सोचते हैं कि कास मेरे पास इतना पावर होता कि में इन सबकी मदद कर पाता , सबकी बात नहीं कर रहा हूं उन लोगों की बात कर रहा हु जो बहुत जल्दी भावनाओं में बह जाते है , 

दोस्तों आज जो मैं कहानी लेकर आया हूं वह आपको यह अहसास दिलाएगी की मदद करने के लिए अर्बोपति होना जरूरी नहीं है आज की कहानी बहुत ही सुंदर और छोटी सी है चलिए शुरू करते हैं ,


Best motivational story


एक छोटा सा परिवार था जिसमें पति पत्नी और उसके पांच बच्चे थे , बहुत साल पहले की बात है उस वक्त उस इंसान की रोज की कमाई तकरीबन 10 या ₹12 हुआ करती थी उसी ₹10 में अपने परिवार का गुजरान चलाता था परिवार बहुत गरीब था , उस छोटे-छोटे बच्चों ने अपने गांव के अलावा और कुछ नहीं देखा था ,

उस इंसान ने बहुत मेहनत करके ₹300 बचाएं और सोचा कि अपने परिवार को मेले में घुमाने ले जाए , उस वक्त जब मेले में जाने के लिए वह बच्चे अपने गांव से बाहर निकले तब उसे इतना आनंद आया जितना आनंद एक मेंढक को कुएं से बाहर निकलकर होता , बच्चे आज बहुत खुश थे 

जब वह मेले के द्वार पर पहुंचे तब वहां पर टिकट काउंटर लगा हुआ था पिता ने कहा कि मैं टिकते लेकर आता हूं तुम सब लोग यहीं खड़े रहो मगर छोटे बेटे ने ज़िद की मैं आपके साथ चलूंगा पिता ने उसे अपने कंधे में बिठाकर साथ ले लिया वह दोनों टिकट काउंटर पर खड़े हो गए , 

बच्चा इतना खुश था कि बार-बार अपने पापा से कह रहा था कि पापा हम अंदर जा कर यह करेगे वो खाएंगे बहुत मजे करेगी और पापा भी उसकी हां में हां मिला रहे थे कि हां बेटा हम सब कुछ करेंगे जब उनकी बारी आई तब उन्होंने टिकट काउंटर पर खड़े इंसान से कहा कि हम 7 लोग हैं , 

टिकट काउंटर में खड़े इंसान ने कहा कि ₹350 हुए उस वक्त उस पिता के हालत क्या हुई होगी उसका एहसास ना मैं कर सकता हूं ना आप यह एहसास वही पिता कर सकता है जिसने इसकी अनुभूति की हो वह पिता एकदम से सुन पड़ गया समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करु , 

वह कुछ सोच रहा था तभी पीछे खड़े इंसान ने उसे कहा कि आपके ₹500 नीचे गिर गए हैं अपने बेटे के हंसते हुए चेहरे को देखते हुए उन्होंने और ₹500 ले लिए और सीधे टिकट काउंटर वाले को दे दिए और वहां से टिकट लेकर रवाना हो गए ,

यह सब कुछ वह बच्चा देख रहा था जो उनके पीछे खड़े इंसान की गोद में था उसे सब पता था कि किस तरह से उसके पिता ने ₹500 नीचे गिराकर अपने ₹500 उस इंसान को दे दिए , इसे कहते हैं मदद करना , 

अब तो आप मानते हैं ना कि मदद करने के लिए अरबोंपति होना आवश्यक नहीं है , आशा करता हूं आपको यह छोटी सी जानकारी पसंद आई होगी ऐसी छोटी सी सीख के साथ फिर मिलेंगे तब तक के लिए गुड बाय एंड टेक केयर , 

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