शुक्रवार, 25 जनवरी 2019

जब हौसला कमज़ोर हो जाए तब इसे याद करना by motivational quotes


जब हौसला कमज़ोर हो जाए तब इसे याद करना motivational quotes

Motivational quotes
जब हौसला कमज़ोर हो जाए तब इसे याद करना 

दोस्तों आशा करता हूं कि आप सब लोग अच्छे होगे और इसी अच्छे मुड़ को और अच्छा बनाने के लिए एक बार फिर मैं एक नई सीख के साथ आया हूं ,

कुछ नया सीखना किसे कहते हैं इसके ऊपर मैंने ऑलरेडी बहुत सारे थॉट्स अपने हर ब्लॉग में लिखे हैं , आज भी एक छोटा सा थॉट्स मेरे पास है जो आपके साथ शेयर करना चाहूंगा , तत्पश्चात हम उसकी बात करेंगे जिसके लिए आज में ब्लॉग लिख रहा हु ,

दोस्तों में एक ऐसी समस्या आपके सामने रखता हूं जिसका सामना हम सब ने किया होगा जैसे कि किसी भी प्रकार का व्यसन , व्यसन का मतलब सिर्फ गुड़खा और सिगरेट नही हिता व्यसन उसे कहते है जो हमारे दिमाग पर हावी होकर हमे हमारे कर्तव्य से विमुख करता है ,

जैसे कि तरुण अवस्था में प्यार का व्यसन , किसी भी इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम का व्यसन , अब आप अगर इस प्रकार के व्यंजन से जब जुड़े होंगे तब आपने लोगों से उसका सजेशन मांगा होगा , उस वक्त सबकी अपनी अपनी एक राय होगी , सब की अलग-अलग राय होगी लेकिन सब की राय सही होगी क्योंकि अपने वक्त पर उसने इस तरह से इस प्रॉब्लम का सोलुशन किया होगा ,

मतलब कि एक ही प्रॉब्लम का आपके पास बहुत सारे सॉल्यूशन है इसी हर एक सॉल्यूशन को हम एक सिख कहते हैं , आई होप की आपको एक छोटी सी जानकारी अच्छी लगी होगी अब हम अपनी बात शुरू करते हैं ,


जब हौसला कमज़ोर हो जाए तब इसे याद करना 


सबको चाय बनाना तो आता होगा अगर नहीं आता है तो सब सीख लीजिए क्योंकि बहुत अच्छी बात होती है और जब बीवी मायके चली जाती है तब काम आता है , वह सारी लड़कियां भी सीख जाओ जो स्टडी कर के कुछ बड़ा बनना चाहते हैं और हाउस वाइफ नहीं बनना चाहती ,

दोस्तों जब कोई चाय बनाता है ना तब वह सबसे पहले  एक तपेली में पानी रखकर उसे गर्म करता है , एक मिनट सबसे पहले मैं यह बता दूं कि मैं आपको चाय बनाना नहीं सिखा रहा हूं एक छोटी सी बात है जो आप अभी सीखेगे इसलिए मैंने इस बात को यहां पर छेड़ा है

वह पानी तब तक गर्म होता है जब तक उसे 211 डिग्री तापमान मिलता है जब वह तापमान सिर्फ 1 डिग्री बढ़ जाता है यानी कि 212 डिग्री हो जाता है तो भाप बन जाता है यानी कि steam बन जाता है और वही भाप बड़े बड़े इंजिन को चलाता है , सिर्फ 1 डिग्री का फर्क इतना कुछ बदल देता है जितना हम और आप सोच भी नहीं सकते ,

अब हम बात करते हैं कि इस 212 डिग्री से हमारा क्या वास्ता है , दोस्तों यह सिचुएशन इन लोगों को लागू पड़ती है जो लोग जिंदगी के किसी मुकाम पर पहुंचने के लिए रोज मेहनत करते हैं और एक दिन उसे लगता है कि अब वह थक चुके हैं , लेकिन यह उसकी बहुत बड़ी गलतफहमी है क्योंकि उसे यह नहीं पता कि जब तक वो भी 212 डिग्री तक नहीं तपते तब तक कुछ बदलेगा नहीं , 

ओलंपिक की हर गेम में गोल्ड और सिल्वर मेडल के बीचमें सिर्फ कुछ सेकंड का फासला होता है लेकिन उन कुछ सेकंड को बनाने के लिए कही साल लग जाते है फ़र्क सिर्फ इतना होता है कि गोल्ड लाने वाले का तापमान अब 212 डिग्री से ऊपर हो चुका है , 

एक रात में सफलता उन्हें मिलती है जो उस एक रात के लिए बहुत सारी रात जागता है आपको भी अपनी जिंदगी के किसी भी मुकाम को हासिल करने के लिए बहुत दिन या फिर सालों तक तपना पड़ेगा उस पानी की तरह 212 डिग्री तक अपने आप को ले जाना है ,

जब आप भी उस जगह पहोच जायेगे तब आपकी भी जिंदगी बदल ही जाएगी क्यों कि यह साइंस का फार्मूला है जो सनातन सत्य होता है जिसे बदलना किसी के हाथ मे नही , 


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