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रविवार, 9 दिसंबर 2018

When the mother is not together || Emotional motivational poetry

Emotional motivational poetry : A blog for mother  of importance , what is our situation when the mother is not together , 

When the mother is not together || Emotional motivational poetry 


When the mother is not together || Emotional motivational poetry by shailesh lodha
When the mother is not together || Emotional motivational poetry



दोस्तों आज मैं कुछ ऐसी कविता लेकर आया हूं जो एक बेटे की है और वह अपनी मां के  विरह में लिखता है , उनका संक्षेप वर्णन में आपके लिए लेकर आया हूं जो उसकी रुदन है उसकी मां मरी नहीं है लेकिन उससे दूर है , 

यह कविता आपको आईना दिखाएगी जो आपने किया था या फिर जो आप कर रहे हैं और अगर आप आज यह सब कर रहे हैं तो शायद इसे पढ़ने के बाद आप यह सब नहीं करेगे , और क्या आप ने किया था और क्या कर रहे हैं वह इस कविता में  पढ़े , 


Importance of mother poetry


कल जब उठकर काम पर जा रहा था ,
तब अचानक लगा कि कोई रोक लगा मुझे ,
और कहेगा की खड़े-खड़े दूध मत पर हजम नहीं होगा ,
दो घड़ी सांस ले ले ,
इतनी ठंड और कोर्ट भूल गया ,
इसे भी अपने साथ ले ले , 
मुझे लगा कि मां रसोई से बोल रही होगी ,
जिनके हाथों में चना आटा होगा लेकिन ,
जब पलट कर देखा तो क्या मालूम था वहां से सन्नाटा था , 


जिस आज़ादी के लिए मैं तुझसे सारी उम्र लड़ता रहा ,
वह सारी आज़ादी मेरे पास है ,
फिर भी ना जाने क्यों दिल की हर धड़कन उदास है ,
कहता था ना तुजसे में वही करुगा जो मेरे जी मे आएगा ,
आज में वही सब कुछ करता हु जो मेरे जी मे आता है ,
बात यह नहीं है कि मैं जो चाहे करलू ,
मुझे कोई रोकने वाला नहीं है ,
बात तो सिर्फ इतनी सी है कि ,

रात को देर से लौटू तो कौन नाराज होगा भला ,
कौन कहेगा बार-बार कि अब कहां चला ,
मेरे वह झूठे सारे बहाने कौन देगा ,
कौन कहेगा कि इस उम्र में क्यों परेशान करता है ,
हे भगवान यह लड़का क्यों नहीं सुधरता है ,
पैसे कहां खर्च हो जाते हैं तेरे ,
ये क्यों नहीं बताता है सारा सारा दिन मुझे सताता है ,
रोज रात को देर से आता है 
खाना गरम करने के लिए जागती रहूं मैं ,
खिलाने को तेरे पीछे भागती रहू में , 
बहाती रहु आंसू तेरे लिए कभी कुछ सोचा है मेरे लिए ,
खेर मेरा तो क्या होना है ओर क्या हुआ है ,
तू खुश रह लेना यह दुवा है ,
और आज तमाम खुशियां ही खुशियां है ,
गम यह नहीं है कि कोई भी खुशियां बांटने वाला होता ,
पर कोई तो होता जो गलतियों पर डांटने वाला होता ,

मां अगर तू होती ना तो हाथ फेरती सर पर ,
आवाज दे दे देकर सुबह उठाती ,
पिताजी की डांट का डर दिखाती ,
बहन को सताता तो तू चांटे मारती , 
बीमार पड़ता तो रो-रोकर नजरें उतारती ,
ये नौकरी करें ये तरक्की करें दुआओं में हाथ उठाती ,
और तरक्की के लिए घर छोड़ देगा शहर छोड़ देगा ,
यह सोचकर दीवाल के पीछे छुप कर आंसू बहाती , 
सब कुछ है मां सब कुछ ,
आज तरक्की की हर रेखा तेरे बेटे को छू कर जाती है ,
पर मा मुजे तेरी बहुत याद आती है , बहुत याद आती है , 

इस कविता को लिखने का मेरा हेतु यही था दोस्तों कि मैं आपको यह बताउ कि जो आज आपको डांट रहे है जो आपको बात बात पर टोक रहे है जिसकी बातें सुनकर आप को ठेस पहुंच रही है वह सब अपने लोग आज आपको बहुत दर्द देते होंगे , लेकिन जिंदगी में एक पल ऐसा आएगा जब आप उनकी आवाज उनकी डाट उनकी रोकटोक तो के लिए भी तरसेगी क्योंकि वही आपके अपने हैं , 

बस इतना ही कहूंगा कि जिंदगी में अपनों के डांट अपनों की रोक टोक से भी प्यार करो क्योंकि आज आपके पास अपने हैं लेकिन 1 दिन ऐसा आएगा जब आपके पास अपने नहीं होगे इसलिए कहता हूं अपनों से प्यार करें , 




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