Search here

शनिवार, 22 दिसंबर 2018

सफलता का रहस्य ~ प्रेणादायक कहानी

सफलता का रहस्य ~ यह एक बहुत ही खूबसूरत प्रेणादायक कहानी है जो सायद कही ना कही आपको सफल होने में सहयोग करेगी ,

सफलता का रहस्य ~ प्रेणादायक कहानी 


सफलता का रहस्य ~ प्रेणादायक कहानी
सफलता का रहस्य 

दो बहुत ही अच्छे दोस्त थे जिसमें से एक का नाम था आरव और दूसरे का नाम था अरनव , बचपन से ही वो एक दूसरे के बहुत ही करीब है मगर वक्त जैसे से गुजरता गया वह एक दूसरे से दूर होने लगे क्योंकि वक्त के साथ जिम्मेदारियां आ जाती है उसी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए हमें अपनों को छोड़ना पड़ता है ,

एक वक्त आया जब अरनव ने अपनी जिंदगी में इतनी सारी सक्सेस हासिल कर ली थी जिनका कोई किनारा नहीं था उसके पास इतने पैसे थे कि वह अपने और अपने परिवार वालों के सारे सपने को साकार कर सकता था लेकिन आरव अभी भी वहीं का वहीं था , 

एक दिना आरव ने सोचा कि क्यों ना मैं अरनव के पास जाकर उसके पास से कुछ ऐसी टिप्स लु कि मैं भी उनके जैसा सक्सेसफुल हो जाउ , यह सोचकर वह अगले दिन अरनव से मिलने के लिए उसके घर पर गया ,



सफलता का रहस्य ~ प्रेणादायक कहानी 


अरनव के पास जाकर उसने कहा कि अरे यार तुम तो कितने सक्सेसफुल हो गए हो मुझे भी कुछ ऐसा बताओ ताकि मैं भी अपनी जिंदगी में कुछ अच्छे मुकाम को हासिल कर पाऊं ओर सक्सेस हो जाऊं , अरनव ने 5 मिनट सोचा उसके बाद उसने आरव से कहा कि तुम कल मुझे सरोवर के किनारे मिलने आना मैं तुम्हें वह टिप्स बताऊंगा ,

आरव अगले दिन जब सरोवर के किनारे पहुंचा तब उसने देखा कि अरनव पहले से सरोवर के तट पर इंतजार कर रहा था , अरनव ने कहा कि जो मैं तुम्हें कहता हूं वह तुम्हें करना पड़ेगा तुम्हें मंजूर है आरव ने कहा कि ठीक है , अरनव ने कहा कि तुम्हें मेरे साथ इस सरोवर को पार करना होगा , 

आरव और अरनव समुंद्र में उतरने लगे धीरे धीरे उसके पैर पानी में डूब गए उसके बाद उसकी नाभि पानी में डूब गए और एक वक्त आया जब पानी उनकी गर्दन तक पहुंच गया , अरनव ने आरव की गर्दन पकड़ के पानी मे डाल दी आरव तड़पने लगा इधर उधर हाथ मारने लगा और लास्ट में उसने अरनव को धक्का मार दिया और ऊपर आ गया , 

आरव ने अरनव से कहा कि अरे यार तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया तब अरनव ने कहा एक बात बताओ दोस्त जब तुम्हारा मुंह इस पानी के अंदर था तब तुम क्या सोच रहे थे तब आरव ने कहा कि बस मुझे किसीना किसी तरह से सांसे मिल जाये यही सोचा , 

तब अरनव कहा कि दोस्त ,

यही सफलता का राज है जब सांस लेने के लिए तुम इतने पागल हो गए कि तुमने मुझे धक्का मार दिया इसी तरह तुम सक्सेस के पीछे इतने पागल हो जाव की जिस तरह आज तुम्हे सांसे मिली है उसी तरह तुम्हे सक्सेस मिल जाए , जाहे कितनी भी मुश्किलें आए फिर अपना पागलपन नही छोड़ना , 



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Share your experience with me