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शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

identification of smart student ,स्मार्ट छात्र की पहचान कैसे करे ,

Smart student : A blog about identification of smart student , what is the difference between smart student and hard student , how can we do smart study , difference between smart study and hard study

identification of smart student


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आज  जब मैं घर पर आया तब एक बुजुर्ग आदमी ने मुझसे पूछा कि तुम्हें 10th क्लास में कितने परसेंटेज आए है , मैंने कहा कि 70 उसके बाद उसने वापस पूछा कि ट्वेल्थ क्लास में तुम्हें कितने परसेंटेज आया है फिर मैंने कहा ५० % , वह कहने लगा इसका मतलब कि तुम पढ़ने में कच्चे हो मैं कुछ बोला नहीं मैं सुनकर खामोश रहा और वहां से चला गया ,

मेरे पापा ने उसे कहा कि उसे जो ५०% परसेंटेज आए हैं वह साइंस स्ट्रीम के हैं तो उसने कहा कि मेरे बेटे की एक बेटी है उसने भी साइंस किया है उसको तो ८२% परसेंट आए हैं, यह सुनकर मुझे ऐसा लगा की शायद लोगों की भूल हो जाती है कभी-कभी एक स्मार्ट स्टूडेंट को ढूंढने में सब लोग यही सोचते कि जो अच्छे अंक से पास हो रहा है वही एक क्लेवर और स्मार्ट स्टूडेंट है लेकिन ऐसा रियल लाइफ में बिल्कुल नहीं होता। है, 

मेरे क्लास में 1 स्टूडेंट था जिसने ट्वेल्थ साइंस क्लास में , मैं भी 12 साइंस का स्टूडेंट हूं उसने ट्वेल्थ साइंस स्टैंडर्ड में सेकंड सेमेस्टर में फिजिक्स में ९९ मार्क्स लिए थे आज वह इंसान जब भी मैं रेलवे स्टेशन पर जाता हूं वहां पर एक स्मार्टफोन को लेकर बैठा होता है मैं उससे पूछता हूं कि तुम करते क्या हो वह कहता है कि मैं BSC करता हूं , आप सब लोग सोचेंगे कि जो इंसान साइंस मै ९९  मार्क्स  के साथ पास आउट हुआ है वह इंसान Mbbs करने की जगह पर बीएससी क्यों कर रहा है ,

इसके बहुत सारे कारण होते हैं जो मैं आज आप सबको बताने वाला हूं और सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट टॉपिक है आज का वह है कि क्लेवर स्टूडेंट किसे कहते हैं , कभी-कभी हमारे मां-बाप भी भूल कर जाते हैं हमें कहते रहते हैं कि बाजू वाले की बेटी या फिर बैठा इतने रैंक लेकर आया तुम इतने लेकर आए हो और बार-बार इसी बात को लेकर हमें टोकते रहते हैं , तो आज का टॉपिक अन पेरेंट्स के लिए भी है जो ऐसा करते हैं तो ज्यादा वक्त ना लेते हुए सुरु करते है identification of smart student ,स्मार्ट छात्र की पहचान कैसे करे , 

Smart student study केसे करते है , 

सबसे पहली बात तो यह है कि आप सब लोग सोचते होंगे कि अगर मैं ज्यादा रैंक लाऊंगा तो मुझे जॉब जल्दी मिल जाएगी तो यह बिल्कुल गलत है , क्योंकि आज होने वाली हर एक सरकारी नौकरी के लिए रैंक नहीं लेकिन उस इंसान का माइंड और उनके कौशल्य को देखा जाता है ,

कभी कभी हम सोचते हैं कि एग्जाम में जो भी एग्जाम होती है कॉन्पिटिटिव उसमें 5थ क्लास से लेकर 10 क्लास तक का क्यों पूछा जाता है तो ऐसा इसलिए होता है क्योंकि 5 और 10 क्लास के अंदर जो टॉपिक होते हैं वह टॉपिक हम आगे जाकर भूल जाते हैं जिस वजह से हम कॉन्पिटिटिव एग्जाम क्लियर नहीं कर पाते लेकिन जो स्मार्ट स्टूडेंट होता है वह ऐसी गलती कभी नहीं करता उसने भले ही 10th क्लास में 5०% परसेंटेज लिए है लेकिन वह जो परसेंटेज होते हैं ,

वह उनकी मेहनत के होते हैं और जो इंसान क्लास में 90% आज लेकर आता है वह इंसान सिर्फ और सिर्फ इंपॉर्टेंट क्वेश्चन की तैयारी करता है और बाकी सारे क्वेश्चन को वह छोड़ देता है क्योंकि वह सोचता है कि एग्जाम के लिए बस इतना ही काफी है लेकिन जो स्मार्ट स्टूडेंट होते हैं वह सोचते हैं कि मुझे आज नहीं तो कल मेरा पढ़ा हुआ हर एक page या फिर सेंटेंस है मुझे काम आएगा इसलिए वह एग्जाम को ना देखते हुए पूरी बुक्स को पढ़ते हैं ना सिर्फ एग्जाम को क्लियर करने के लिए बल्कि अपनी आने वाली जिंदगी को अच्छी बनाने के लिए , यह होता है एक होशियार छात्र ,

कुछ साल पहले एक रेलवे या फिर आर्मी की कॉन्पिटिटिव एग्जाम में एक सवाल पूछा गया था कि ( २+२×२=)  , मेरे साथ हॉस्टल में रहने वाला एक स्टूडेंट एग्जाम को देने गया और आकर वह मुझे कहने लगा कि एग्जाम बिल्कुल टफ नहीं थी देखो इसमें कैसे कैसे सवाल पूछे गए हैं उसने मुझे यह सवाल दिखाया और कहां के देखो यह तो तीसरी क्लास में आने वाला क्वेश्चन है ,

मैंने उसे कहा कि तुमने इसका जवाब क्या लिखा तो उसने मुझे कहा कि  ऑफिशियली इसका जवाब तो ८ ही आता है ना , एक्चुअली उसने किया क्या था उसने सबसे पहले टू प्लस टू इज इक्वल टू 4 उसके बाद  (४×२ = ८ )   इस तरह से उसने इस क्वेश्चन का उत्तर दिया , 

मैं जानता हूं कि यहां भी बहुत सारे लोग ऐसे होंगे जिसने पहले से इस क्वेश्चन का आंसर 8 सोच लिया होगा लेकिन इसका आंसर 8 नहीं आता , इस सवाल के जवाब को ढूंढने के लिए मैंने केलकुलेटर निकाला और उस में यह सवाल टाइप किया तो उसमें इसका जवाब ८ रहा था , फिर जब मैंने मोबाइल के केलकुलेटर में से इसका जवाब पता किया तब उसने इसका जवाब सिक्स आ रहा था , 

आप सबको पता है कि जो जवाब मोबाइल के केलकुलेटर में से मिला था वही सही जवाब था , लेकिन सब लोग सोचने लगे कि ऐसा क्यों था , तब मैंने उसे कहा कि जब हम तीसरी क्लास में पढ़ते थे तब एक नियम था भागूसबा , मतलब भी कोई भी सरसरी करने से पहले सबसे पहले उसमें दिए गए भागाकार को क्लियर करना है उसके बाद गुणाकार उसके बाद प्लस और फिर माइनस किया जाता है , लेकिन इतनी छोटी सी बात हमारे देश में 35% लोग जो कॉन्पिटिटिव एग्जाम देने जाते हैं वह जानते नहीं होते हैं जिस वजह से वह फेल हो जाते हैं , लेकिन जो इंसान इस सवाल का जवाब भी सही देकर आए उसे भी हम एक स्मार्ट स्टूडेंट कहेंगे ,   

Rank of smart student

कभी-कभी हम अपनी बराबरी ऐसे स्टूडेंट से कर बैठे हैं जो स्टूडेंट बचपन से ही प्राइवेट क्लासेस में पढ़े होते हैं और प्राइवेट स्कूल में पढ़े होते है , मुझे 12th साइंस में  ५०% और उस लड़के को 82%  आए है उसका एक सबसे अच्छा और सबसे सही उदाहरण मैं आप सब को बताना चाहता हूं कि वह जो लड़की जो ८२%  परसेंटेज ले कर आई  है वह लड़की बचपन से प्राइवेट स्कूल में पढ़ी है और उसके  साइंस के खर्चे को अगर देखा जाए तो वह था ५ लाख ,

लेकिन उस के ऑपोजिट अगर आप मेरी बात सुनेंगे तो मैंने 12th साइंस सिर्फ 48k मैं क्लियर किया है वह भी बिना किसी क्लासेज के , और मैं बचपन से ही सरकारी स्कूल में पढ़ कर बड़ा हुआ हूं, तो अब आप समझ गए होगे कि कभी-कभी कुछ लोगों को ज्यादा परसेंटेज क्यों आते हैं , 

आप में से कुछ लोग सोचेंगे कि ऐसा थोड़ी ना होता है कि जिस लोगों को क्लासेस नहीं मिले वह लोग ज्यादा परसेंटेज नहीं ला सकते वह लोग भी ज्यादा परसेंटेज ला सकते है , लेकिन आप सोचिए जो इंसान सिर्फ और सिर्फ पूरा दिन स्टडी ही करता है सुबह उठकर स्कूल में जाता है दोपहर को आकर क्लासेस में जाता है ,

उसे बड़े बड़े शिक्षकों से मार्गदर्शन मिलता है , लेकिन जो इंसान घर बैठे बैठे पढ़ता लिखता है सिर्फ और सिर्फ स्कूल में जाता है वह भी सरकारी जहां पर शिक्षक सिर्फ और सिर्फ अपना टाइम निकालने के लिए आते हैं , जब वह इंसान घर पर आता है और उसे कुछ प्रॉब्लम आती है तो वह किसके पास जाए , 

इसी वजह से जो इंसान पहले से ही प्राइवेट स्कूल में पढ़ा लिखा है उसका बेसिक नॉलेज भी स्ट्रांग होता है और जो इंसान सरकारी स्कूल में पढ़ा होता है उसे सिर्फ और सिर्फ बुक्स का नॉलेज दिया जाता है जिस वजह से उसका बेसिक नॉलेज बहुत वीक होता है तो जो इंसान घर बैठे पड़ रहा है और उसे कम अंक आए हैं इसका मतलब यह नहीं है कि वह इंसान स्मार्ट स्टूडेंट नहीं है वह इंसान भी एक स्मार्ट स्टूडेंट है अगर उसने घर बैठे बैठे अच्छे नहीं रैंक नहीं लाए है लेकिन रैंक लेकर आया है तो उसे भी हम एक स्मार्ट स्टूडेंट कहेंगे ,

 स्मार्ट स्टूडेंट नोटिस करते है ,


स्मार्ट स्टूडेंट की सबसे पहली निशानी यह होती है कि वह कभी भी किसी भी बात को इग्नोर नहीं करते है , ऐसे बहुत सारे सवाल होते है जो आप दिन में फेस करते होगे फिर उसके बारे में सोचने से ज्यादा आप उसे छोड़ देते हैं , आजकल तो साइंस में पढ़ने वाले सब स्टूडेंट सोचते हैं कि न्यूटन वह सेब खा क्यों नहीं गया अगर उसने वह सेब खा लिया होता तो शायद हमें आज यह सब कुछ फेस करना नहीं पड़ता ,

आज सब की मान्यता ऐसी ही हो गई है , लेकिन न्यूटन ने वह सेब खाया नहीं और उस पर रिसर्च किया था इस वजह से आज पूरी दुनिया में उसका नाम है , तो जो स्मार्ट स्टूडेंट है वह अपने पूरे दिन में होने वाली हर एक बात को नोटिस करता है और उस पर रिसर्च करके पता करता है , जैसे कि आप मे से बहुत सारे ऐसे लोग होंगे जिसे यह पता नहीं होगा की , 

दुनिया बहुत आगे बढ़ गए हैं हर एक चीज पर रिसर्च करके उसे अलग बनाया जा रहा है लेकिन आज भी किसी भी कंट्री के गाड़ी के टायर का कलर अगर आप देखें तो वह काला कि होता है , पेन के ढक्कन में छेद क्यों होता है , ब्लड में बीच में जगह क्यों होती है , प्लेन का रंग सफेद क्यों होता है , शमशान पर स्त्रियों को जाना अलाउड क्यों नहीं है , शादी करते हुए दूल्हे के पास तलवार क्यों होती है , यह तो सिर्फ एक नमूना था ऐसे तो बहुत सारे सवाल मेरे पास है क्या आप में से किसी को इनमें से किसी सवाल का जवाब पता है ,

तुम मुझे कमेंट बॉक्स पर लिखकर जरूर बताना और अगर कोई जानना भी चाहता है इसका जवाब क्या है टोपी मुझे कमेंट बॉक्स पर लिखकर बताएं और ऐसे ही बहुत सारे सवाल है जो आप सबको घर जाना है तो आप मुझे कहिए तो मैं आपको एक PDF भेजूंगा जिसमें आपको ऐसे ही सवालों के लिस्ट और जवाब भी होगे , तो इस तरह की जानकारी रखने वाले लोग ही एक स्मार्ट स्टूडेंट कहलाते हैं ,

Smart people and smart student


कभी-कभी कुछ लोग ऐसे होते है जिसके पास डिग्री ना होते हुवे भी कामयाब होते है , जैसे कि सचिन तेंदुलकर  , धीरूभाई अंबानी बहुत सारे लोगे अगर जिसका जिक्र यहां पर करने बैठ गया तो बहुत लंबा हो जाएगा इस तरह के लोग अपनी लाइफ में बहुत सक्सेसफुल बने है  , बिना किसी डिग्री या लायकत के , ऐसा क्यों हुआ उसका कारण यह है कि वह एक स्मार्ट लोग थे ,

स्मार्ट लोग और स्मार्ट स्टूडेंट इन दोनों में सिर्फ सिर्फ इतना है कि जो स्मार्ट स्टूडेंट होते हैं वह स्मार्ट लोग भी होते हैं और जो स्मार्ट लोग होते हैं वह स्मार्ट स्टूडेंट नहीं होते है, जैसे कि धीरूभाई अंबानी है वह स्टूडेंट नहीं थे उसने अपनी लाइफ में कुछ भी डिग्री हासिल नहीं की थी लेकिन वह एक बड़े आदमी बने क्योंकि उनके पास एक सोचे थी जो उन्हें आगे ले गए , इसी तरह जो स्मार्ट स्टूडेंट होते हैं उसके पास डिग्री भी होती है और दिमाग भी होता है जिस वजह वह एक दिन कामयाब इंसान बनते हैं , 

कभी-कभी कुछ लोग पढ़ते होते हैं और जो इंसान पढ़ता नहीं है उसे टोकते रहते हैं कि तुम तो सिर्फ पूरा दिन घूमते रहते हो और कुछ काम काज नहीं करते हो ,  तुम इस तरह के टोंक मारते रहते है , और जब वही इंसान एक दिन उनसे भी ज्यादा पैसे कमाता है तो उनका सर नीचे झुक जाता है ,

मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि कभी भी किसी भी इंसान को अंडर एस्टीमेट मत करो , लास्ट में बस मैं इतना कहना चाहता हूं कि सरकार आप को जॉब आपके रैंक को देखकर नहीं आपके कौशल्य को देख कर देती है इसलिए तैयारी ऐसे करो की आगे जाकर आपको पछतावा ना हो ,  तैयारी कभी भी अच्छे अंक पाने के लिए ना करें , 

आज के लिए बस इतना ही दोस्तों अगर आपको मेरा यह ब्लॉग पसंद आया है तो मुझे कमेंट जरुर करें क्योंकि आपकी एक कमेंट से हमें पता चलता है कि हमारी जो यह मेहनत है , वह बेकार नहीं जा रहे ओके गुड बाय एंड टेक केयर ऑल 

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