सोमवार, 13 अगस्त 2018

एक सैनिक की आवाज ।। वतन वालो वतन ना बेच देना ।।

 एक सैनिक की आवाज ,

एक सैनिक की आवाज
 एक सैनिक की आवाज ।। वतन वालो वतन ना बेच देना ।।


वतन वालो वतन ना बेच देना , यह धरती ये गगन ना बेच देना शहीदों ने जान दी है वतन के वास्ते शहीदों के कफन ना बेच देना , हर दिल इतना मजबूत नहीं होता कभी भी जज्बातों का कोई सबूत नहीं होता , हमारे दिल में जो जज्बात छुप है उसका सबूत हम कभी किसी को नहीं दे सकते , लेकिन अगर आप सैनिकों की आंखों में जाकर देखें तो आपको पता चलेगा कि उनकी आंखों में  कुछ खास है कुछ कर दिखाने की वजह बिल्कुल पास है , 

एक सैनिक कड़कती हुई सर्दी में गरजते हुए बादल में और भीषण गर्मी में जब सरहद पर खड़ा होता है तब जाकर आप घर पर सुकून से सो पाते हैं , एक सैनिक पर हमारे बहुत सारे कर्ज है अगर मैं आपको याद दिलाओ तो आप अगर खुली हवा में सांस ले रहे हैं वह भी एक सैनिक का कर्ज है आप पर , आप रात को सुकून से सो पा रहे हैं वह भी एक सैनिक का कर्ज है आप पर , आप पूरा दिन घूमते रहते हैं पूरा दिन मस्ती और उल्लास से निकालते हैं वह भी एक कर्ज है सैनिक का आप पर , इसलिए कभी बात हो उनके कर्ज को याद करने की तो अपने आसपास नजर उठा कर किसी सैनिक को देख लेना , 

हर वक्त जो सरहद पर डटे रहते है उसे मुहूर्त मत समझ लेना , जब चारों तरफ उजाला होता है तब एक घर अंधेरे से भरा होता है जानते हो उस घर में एक बेटा जब अपनी मां के पास जाकर कहता है कि मा इस बार दिवाली पर पापा क्यों नहीं आए , मां तूने हाथों में चूड़ियां क्यों नहीं पहने हैं मां तूने माथे पर कुमकुम क्यों नहीं लगाया है मां तूने बिंदिया क्यों नहीं लगाई है मां तूने सिंगार क्यों नहीं किया है , तुम्हारे पांव में घुंघरू भी नहीं है तुम्हारे बिखरे हुए बाल क्यों है मां ,
वतन वालो वतन ना बेच देना
 एक सैनिक की आवाज ।। वतन वालो वतन ना बेच देना ।।

मां तू कितनी प्यारी लगती थी लेकिन यह कैसा हाल है तुम्हारा ,  पापा क्यों नहीं आए इस दिवाली को घर पर , बेटा थोड़ी देर के लिए जब बाहर खेलने कूदने जाता है और अपने दोस्तों के पास खिलौने देखता है जो खिलौने उसके पापा उनके लिए लाए होते हैं , फिर वह अपनी मां के पास जाता है और कहता है कि मां किसी के पापा उनके लिए नए कपड़े लाया है किसी के लिए मिठाई लाया है उनके पैरों में नए शूज है , पापा पापा कह कर सब ने मुझ को चिढ़ाया बोलो ना मा दीपावली पर अब की बार पापा क्यों नहीं आए , 

जब बेटा चिढ़ जाता है फिर अपनी मां से कहता है कि मा 2 दिन हो गए तुमने मुझे बताया नहीं और पिछली बार की तरह इस बार तुमने खीर भी नहीं बनाई आने दो पापा से मैं सब कुछ बताऊंगा अब से  मैं तुम्हारे साथ बात भी नही करूंगा , कुछ दिन बाद जब उसके घर पर उनके पिता की लाश आती हैं तो बेटा कुछ देर अपनी मां को भी देखता है और कुछ देर अपने पापा को , तब बेटा कहता है कि मां तू उदास मत होना मुझे सारे जवाब मिल गए हैं और आज एक मकसद जिंदगी का मिल गया और जीने का ख्वाब भी मिल गया , पापा का जो काम अधूरा रह गया है ना उस से लड़कर मैं 1 दिन पूरा करूंगा मा , अब सायाद आपको पता चल गया होगा कि सैनिक कभी एक मूरत नहीं होता है , 

कारगिल का युद्ध 


2 मय 1999 को आज सब लोग भूल गए हैं लेकिन मैं कुछ चंद लाइने आपको जरूर याद दिलाना चाहता हूं , जी हां दोस्तों यह वही दिन है जिस वक्त कारगिल के युद्ध की शुरुआत हुई थी जिसमें हमारे सैकड़ों जवान मारे गए थे , उस वक्त बनी कुछ घटनाओं के बारे में जब हम सोचने भी चाहते हैं तो हमारी रूह कांपने लगती है , एक चरवाहा कश्मीर की पहाड़ियों पर अपने याक को ढूंढने निकला तब उसने पहाड़ की चोटी पर खड़े कुछ लोगों की चहल-पहल को देखा उसने यह बात सैनिकों को बताएं , 

यह सुनकर हमारे 5 सैनिक पहाड़ की चोटी पर गए और उसका जो हाल हुआ जिसे सुनकर लोगों की रूह कांपने लगती है फिर सोचिए उन जवानों का क्या हुआ होगा , उन जवानों के छोटे-छोटे टुकड़े करके पहाड़ी से गिराया गया , जब पता चला की यह युद्ध की घोषणा है तब एयरफोर्स के कुछ जवान जब प्लेन लेकर उस चोटी के भीतर जाने की कोशिश कर रहा था तब सामने से एक तोप की फायरिंग हुई जिन से बचने के लिए प्लेन में बैठे हुए जवान ने पैराशूट के साथ कूद गया लेकिन उनसे गलती यह हुई कि वह पहाड़ की दूसरी ओर गिरा जहां पर दुश्मनों ने कब्जा कर रखा था , 

सबसे पहले उन लोगों ने उस जवान की आंखें निकाली फिर उनकी गर्दन काटी और फिर उनके छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए , इतना सब कुछ होने के बाद भी हमारे सैनिकों के हौसले बुलंद थे एक और एयरफोर्स की टुकड़ी उन चोटी की तरफ जाने लगी उसका भी यही हाल होगा जो हाल उन जवान का हुआ था , दोस्तों में बात करना चाहता हूं हमारे जवान के hosले के बारे में , 

बहुत कम लोग होते हैं जो अपने हौसले को इतना बुलंद कर पाते हैं , अपने लिए तो हर कोई जीता है मेरे यारों कभी दूसरों के लिए जी कर देखो सच मानो यारों सुकून की नींद सो पाओगे , यह वो वक्त था दोस्तों जहां पर अगर हमें फतह हासिल करनी हो तो हमारे 6 और उनके 1 सैनिक की बलि चढ़ेगी , इतना सब कुछ जानते हुए भी हमारे नौजवान डटे रहे , फक्र है मुझे उन नौजवानों पर जिसने अपनी माटी की कदर करी लेकिन शिकवा है मुझे उन जवानों से जिसने उन्हें सलामी भी नहीं दी , 

इस दौरान जब एक सैनिक को पहाड़ों की चोटी से खोजा गया तब उनकी छाती में लिखे हुए अक्षरों को देखकर सब शॉक्ड हो गए वहां पर लिखा था सारे जहां से अच्छा हिंदुस्ता हमारा , उस नौजवान की मृत्यु बिना कुछ खाए हुई थी , फिर भी उनके हौसले बुलंद थे , इसीलिए कहता हूं मेरे यारों वतन मत बेच देना  बहुत सारे शहीदों ने इस वतन के लिए अपना लहू गिराया है , 

आज भी कभी कश्मीर के पहाड़ों के चट्टान को देखो हमारे ही लोगों के लहू से भरे पड़े है , जब कारगिल के युद्ध की घोषणा हुई थी तब सारे सैनिकों ने अपने घर के लिए पत्र लिखे थे कुछ पत्र उनके सबके शब के साथ पहुंच गए और कुछ ऐसे थे जो कुछ दिन बाद पहुंचे , उन्ही में से एक पत्र के बारे में मैं जो कैप्टन विजयंत थापर ने लिखा है ,   आपको कहना चाहता हूं , उसमें लिखा था ,

कैप्टन विजयंत थापर का पत्र 

एक सैनिक की आवाज
 एक सैनिक की आवाज ।। वतन वालो वतन ना बेच देना ।।

पूज्य पापा मम्मी बर्डी और ग्रेनी , जब तक आपको मेरा यह पत्र मिलेगा तब मैं दूर  upar आसमान पर आपको देख रहा होगा , मुझे कोई शिकायत और अफसोस नहीं है और अगर मैं दूसरे जन्म में भी इंसान के रूप में पैदा हुआ तो मै एक बार फिर इंडियन आर्मी ज्वाइन  करूंगा , और एक बार फिर अपने भारत देश के लिए लड़ूंगा अगर हो सके तो आप एक बार उस जगह पर जरूर आना जहां पर आप के कल के लिए भारत के नौजवान लड़ रहे हैं ,


मेरे मरने के बाद अगर संभव हो तो मेरे अंग दान कर देना , अनाथालय में भी पैसे दे देना और कश्मीर में रुखसाना को हर महीने ₹50 देना  और योगी बाबा से भी मिलना  बर्डी को मेरा बेस्ट ऑफ लक , देश पर मर मिटने वाले जवानों को कभी मत भूलना और पापा आप तो मुझ पर गर्व करते हो ना , मम्मी आप को मेरी दोस्त है मिलना मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं मामा जी आप मुझे मेरी शरारतों के लिए माफ कर देना , ठीक है फिर अब समय आ गया है कि मैं अपने साथियों के पास जाओ बेस्ट ऑफ लक फॉर लीव लाइफ ,

यह था विजयंत थापर का पत्र जिसमें रुखसाना 6 साल की लड़की है जिसकी मम्मी पापा को दुश्मनों ने उसके सामने मार दिया था , यह एक जवान का दिल उनका जज्बा उनकी ताकत अपने देश के लिए मर मिटने का एक जज्बा अगर किसी में है तो वह है एक जवान , 

इसीलिए कहते हैं मेरे दोस्तों की शहादत से बड़ी कोई इबादत नही होती , हमने शहादत होने की हिम्मत तो नहीं है लेकिन आज अगर आपका दिल करता है तो सैनिकों की शहादत को सलाम में जरूर करना , यह तो एक छोटा सा उल्लेख था जो मैंने आपको किया ऐसे तो बहुत सारे उदाहरण है जिसको अगर आपके सामने रखने गया तो सालों गुजर जाएंगे , 

मैं आज आपको यह नहीं कहूंगा कि अगर आपको यह पसंद आया हो तो कमेंट और शेयर करना क्योंकि अगर इतना सब कुछ सुनने के बाद अगर कोई कमेंट और शेयर नहीं करता तो मुझे नहीं लगता कि हमारा देश आगे बढ़ गया है ,


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