रविवार, 26 अगस्त 2018

Heart touching story about काका कालेलकर


भाई बहेन का प्यार
Rakshabandhan

   
Heart touching best story   

आज भी मुझे पक्का याद नहीं है की मैंने यह कहानी कोनसी क्लास में पढ़ी थी लेकिन कहानी पूरी याद है और आज रक्षाबंधन के इस शुभ पर्व में आपके सामने रखने का मुझे मौका मिल रहा है इसलिए में बहुत खुश हु और आप भी बहुत खुश हो जायेगे , कवी कालेलकर की यह कृति उनकी जिंदगी से जुडी है उन्होंने अपनी लाइफ जो कुछ भी फेस किया अपनी बहेन के लिए वह सब आज मैं आप सबको बताना चाहता हूं , 

काका कालेलकर की कहानी


में तक़रीबन 7 साल का था मेरे घर में मेरे मम्मी पापा और में रहते थे एक दिन जब मैं आंगन में खेल रहा था तब अचानक एक गाड़ी आई वह गाड़ी मेरे घर की ओर आ रही थी में उसे देख रहा था वह गाड़ी सीधे मेरे आंगन में आ कर रुक गई  , मैं सोचने लगा कि कौन हो सकता है थोड़ी देर बाद उसमें से एक 20 साल की महिला उस महिला के हाथ में एक बच्चा था वह महिला फटाक से मेरे घर में चली गई मैं सोचने लगा कि आखिर यह है कौन चेहरे से तो जानी पहचानी लगती है मेरी मां उसे मिली उसे गले लगाने लगी बाद में मुझे पता चला की यह तो मेरी अक्का (बड़ी बहेन) है ,

एक साल हो गया था अपनी बहेन को देखे और शादी के बाद तो हर लड़की बदल जाती है , बेटी सच में एक समर्पण का पात्र है जेसे पानी अपना आकार बदलता है वेसे ही बेटिया अपने घर को छोड़ने के बाद अपने आपको बदल देती है , थोड़ी देर बाद मेरी अक्का मेरे पास आई और मुझसे कहने लगी की भूल गया ना मुझे , में कुछ देर चुप रहा बादमे हम फिर से पहले की जिसे बाते करने लगे ,

मेरी अक्का मेरे लिए बहुत सारे खिलौने लेकर आए थी और जिसे देख कर मैं बहुत खुश हो गया वह बहुत दिनों के लिए आई थी मेरे पापा और मम्मी मुझे तो जैसे भूल ही गए थे अक्का के आने के बाद सब पूरा दिन उनके पीछे घूमते रहते  मैं अक्का से चिढ़चिढ़ाने लगा , अक्का के आने के बाद पापा पुरा दिन बस उसके लिए यह लेकर आव वो लेकर आव पूरा दिन सिर्फ अक्का के नाम की माला जपते रहते थे , 

हमने एक पोपट को पिंजरे में रखा था उसे देखकर अक्का ने उस पोपट उस पिंजरे से निकाल दिया मुझे बहुत गुस्सा आया तब अक्का ने मुझसे कहा कि जिसे हम स्वतंत्र घूमते हैं वैसे ही इसे भी इस दुनिया में घूमने का हक है अगर तुम्हें कोई बंध कर के रखे तो तुम्हें कैसा लगेगा इसलिए हमें इसे ऐसे क़ैद कर के नहीं रखना चाहिए यह बहुत बुरी बात  हैं अक्का कि इस बात पर सब लोग बहुत खुश हुवे और में भी , मेरी अक्का मुझे रोज नया नया सिखाती थी और साथ में हम रोज खेलते भी थे ,

एक दिन जब में बहार से खेल कर आया तब हमारे पड़ोस की आंटी मेरे पास आई और कहने लगी की तुम्हरे घर में कोई नहीं है सब लोग मेरे घर पे है चलो वहा , में वहा गया तो मेने देखा की वहा कोई भी नहीं था , मैंने आंटी से कहा की कहा है सब उन्होंने कहा की सब लोग अभी आ जायेगे तब तक तुम यहाँ बेठो में तुम्हारे लिए खीर बना कर लाती हु ,


Brother and sister story


बहुत देर हो गई थी लेकिन अभी तक कोई भी नहीं आया था मुझे बहुत चिंता होने लगी में बार बार आंटी से पूछ रहा था लड़कीं आंटी कोई जवाब नहीं दे रही थी अब शाम होने वाली थी में आंटी के घर से निकल के अपने घर की और गया , जब में अपने घर में गया तब मेने देखा की सब लोग सफ़ेद कपडे पहन कर रो रहे थे और सामने एक बड़ा सा हार लगा हुवा मेरी अक्का का फोटी था मैं बहुत छोटा था इसलिए मैं कुछ समझा नहीं ,

मैं सीधा अपने पापा के पास गया और पापा को जाकर कहा कि पापा ऐसा क्या है तब मेरे पापा ने कहा कि बेटा तुझे राखी बांधने वाली अब नहीं रहे तेरी अक्का अब नहीं रही वह हमें छोड़ कर चली गई , वह पल वह लम्हा वह माहोल मेरे समझ से परे था , मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था माँ और पापा ने खाना छोड़ दिया था रोज अक्का को याद करके रोते थे , अब तक की जो यह कहानी में आप सबको बता रहा था वह मेरे बचपन की थी जिसमे मुझे अक्का का मतलब भी नहीं पता था , 

आज 10 साल बाद जब में उस दिन को याद करता हु तो मेरे आखो से आशु की नदिया बहन सुरु हो जाता है आज मुझे पता चला की आखिर मेरी अक्का को क्या हुवा था जब कोई महिला नवजात शिशु को जनम देती है तब उसे जो फीवर आता है वही उस दिन मेरी अक्का से साथ हुवा जिसने मुझसे मेरी अक्का छीन ली ,

आज मुझे पता चला की अक्का के आने के बाद मम्मी पापा पूरा दिन उसके बारेमे क्यों सोंचते थे एक स्त्री अपने ससुराल में अपनी इच्छामुजब नहीं रह सकती और जब वह घर आती है तब हमारा यह फ़र्ज है की हम उन्हें जितनो हो सकते उतनी खुशिया दे , आज जब किसी भाई बहेन को देखता हु तब मुझे अपनी अक्का की बहुत याद आती है , आज जब राक्षबंधन में कलाई में राखी नहीं देखता तब मुझे मेरी अक्का की बहुत याद आती है , आज भी अफ़सोस है की में अक्का को विदाय भी नहीं दे पाया , 

इतने सालो बाद जब में कवी बन गया हु तब हजारो राखिया मेरी कलाई पर है लेकिन आज भी मुझे मेरी अक्का की राखी का इंतजार है , अक्का में आपको बहुत याद करता हु और आपसे बहुत प्यार करता हु , 

i hope की आपको भाई बहेन ना निःस्वार्थ प्रर्म की कहानी अच्छी लगी होगी , शेयर जरूर करना , 


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