शनिवार, 7 जुलाई 2018

स्वर्ग ओर पृथ्वी एक अदभुत प्रेम कहानी , हिंदी

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स्वर्ग ओर पृथ्वी एक प्रेम कहानी , हिंदी

स्वर्ग ओर पृथ्वी

                 
क्लास 9th या 10th में,  exactly मुझे पता नहीं है , लेकिन इनमें से ही किसी एक क्लास मै यह सुंदर ओर अदभुत प्रेम कहानी का उलेख था, आज अचानक मुझे वह कहानी याद आ गई है औऱ में उसे यह पर लिखना चाहता हु ताकि अगर आज के बाद में इसे भूल भी जाऊ तब भी में इसे यहां से पढ़ सकू,


जैसे वृन्दावन की सारी गोपीया किशन के अलावा नहीं रह सकती थी वैसे ही स्वर्ग की सारी अप्सरा गंधर्व के बिना अधूरी थी , गंधर्व स्वर्ग लोक का एक बहुत ही सुन्दर इंसान था जिस पर स्वर्ग की सारी अप्सरा मोहित थी , गंधर्व बहुत ही सरल ओर हसी मजाक करने वाला था , उसके चहरे पर कभी मायूसी पूरे स्वर्ग लोक ने नहीं देखी थी, 

वह हमेशा हस्ता खेलता ओर अपने साथ सारी अप्सरा को भी हसाता , स्वर्ग की सारी अप्सरा को गंधर्व से मोह हो गया था उनके बिना जीना मानो नरक जैसा लगता था , बहुत खुश रहने वाले गंधर्व से एक दिन बहुत बड़ी भूल हो गई , 

स्वर्ग के रहेवासी को पृथ्वी लोक मै जाने की अनुमति नहीं थी , लेकिन गंधर्व से यह भूल हो गई , स्वर्ग के महाराज इन्द्र ने एक सभा आयोजित करी ओर गंधर्व को सजा घोषित दी, जिसमें यह था कि आज से पूरे एक महीने के लिए गंधर्व को पृथ्वी लोक मै रहना होगा , 

एक महीने की समाप्ति पर स्वर्ग से एक विमान आयेगा उसमे बैठकर ही गंधर्व वापस स्वर्ग लोक मै आगमन करेगा , जब कृष्ण भगवान को वृन्दावन छोड़ कर मथुरा जाना था तब सारी गोपिया रोई थी , आज भी गंधर्व को मिली सजा मानो स्वर्ग की सारी अप्सरा को भी मिली हो , 

              
स्वर्ग से उतरा एक विमान गंधर्व को एक जंगल मै उतार कर चला गया , गंधर्व उस जगह को देखकर चौक गया क्योंकि कहा स्वर्ग की मालीपा ओर कहा पृथ्वी , रात होने वाली थी गंधर्व वही सो गया , सवेरा हुआ उसने देखा कि उसके पास कुछ भोजन ओर छाल के वस्त्र रखे हुवे थे , गंधर्व हैरान था ! इस घने जंगल मै कोन है जिसने यह सब कुछ रखा होगा , 

गंधर्व ने भोजन ग्रहण किया ओर आगे बढ़ा शायद कोई आसपास मिल जाए , कुछ दूरी पर एक छोटी सी कुटिया थी , गंधर्व ने वहा जाकर आवाज लगाई "कोई है " कुछ देर बाद एक लड़की बहार आई और कहा " जी " मानो सोरठ के धरती की अप्सरा उतरी हो , लेकिन स्वर्ग की अप्सरा के साथ बड़ा हुआ गंधर्व उनकी खूबसूरती क्या देख पाता , गंधर्व ने पूछा कि क्या यह आपका है आप कोन है , लड़की ने कहा कि मेरा नाम छाया है,

गंधर्व : आपने यह सब वह रखा था , क्यों ?

छाया : जब में सुबह लकड़ियां लेने जा रही थी तभी मुझे जंगल मै आप दिखे , मुझे लगा शायद आप भटक गए है  इसलिए मैंने खाना रख दिया, क्या आप नाटक मै काम करते है, 

गंधर्व : नाटक ! जी नहीं मै तो स्वर्ग से आया हूं , एक महीने के लिए , 

छाया : ( मन मै जरा हस कर ) अच्छा तो आप स्वर्ग से आए है , यहां आप जंगल देखने के लिए आये,
      
          ( तभी वहा पर छाया के दादाजी आते है )

गंधर्व : तुम हस क्यों रही हो , मै सच कह रहा हूं , 

दादाजी ; कोन है बेटा यह 

छाया : दादाजी, यह स्वर्ग से आए है पृथ्वी की शेर करने के लिए ( हसते हुवे)

दादाजी : सकल से तो नाटक वाला दिखता है , 

गंधर्व : (गुस्से से ) मैंने कहा ना मै स्वर्ग से आया हूं ( गुस्से के साथ वह वहा से चला गया ) 

छाया : अच्छा रुको तो सही ,

                   इतने में वह चला गया , गुस्से के साथ जंगल मै जा रहा था , थोड़ी देर बाद एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया , तभी वहा पर छाया अाई ,

गंधर्व : क्या है अब !

छाया : तुम सच में स्वर्ग से आए हो , 

गंधर्व :  " हा " 

छाया : लेकिन यहां क्या इस जंगल को देखने आए हो ( जरा हस्ते हुए ) 

गंधर्व : नहीं , 

छाया : फिर 

गंधर्व : मुझे सजा मिली है , 

छाया : केसी सजा , क्या किया था तुमने , 

गंधर्व : हमारे स्वर्ग का कायदा तोड़ा है , इसलिए मुझे एक महीने तक पृथ्वी पर रहने की सजा मिली है , 

छाया : लेकिन तुम्हे एशा क्यों लगता है  की पृथ्वी पर रहना मतलब सजा है , हमारी पृथ्वी इतनी भी बुरी नहीं है , 

गंधर्व : अच्छा !

छाया : अच्छा यह सब छोड़ो ओर बताव की खाना खाया या नहीं , 

गंधर्व : नहीं ,

छाया : क्यों ?

गंधर्व : मुझे भूख नहीं है , 

छाया : अच्छा तो भूख लगे तो हमारी झोपड़ी पर आ जाना थिक है राजकुमार ( हस्ते हुए ) 

अपने पास पड़े हुवे पत्थर को एक के बाद एक हाथ मै लेकर उछाल रहा था गंधर्व, छाया थोडी दूर जाकर पेड़ के पीछे खड़ी सब देख रही थी , गंधर्व पर स्वर्ग की सारी  अप्सरा मोहित थी फिर छाया तो पृथ्वी लोक की थी उसका मोहित होना निश्चित था , कुछ देर तक गंधर्व वही पर बैठा रहा लेकिन कुछ देर बाद उसे भूख लगी , ना चाहते हुए भी उसे छाया के पास जाना पड़ा , उसके खड़े होते ही छाया अपने घर की ओर चल पड़ी , गंधर्व वहा पहोंचा उसने देखा छाया अपना काम कर रही थी , 

छाया : क्या हुआ ,

गंधर्व : मुझे खाना खाना है , 

दादाजी : छाया जाओ जाकर इसके लिए खाना लगा दो ,

छाया : जी दादाजी ! चलिए 


छाया ने गंधर्व के लिए खाना परोचा , गंधर्व कुछ देर खाना देखता रहा ओर फिर छाया की ओर देख कर खाना सरू कर दिया , बड़ी छाव से गंधर्व ने खाना खाया , ओर फिर बाहर निकल कर दादाजी को प्रणाम करके चला गया , अब गंधर्व उस जंगल की प्रदक्षिणा करता रहता ओर रात होते ही , पेड़ के नीचे सो जाता , सुबह उसके उठने से पहले ही छाया उसके लिए खाना रख कर चली जाती साथ मै छाल के वस्त्र भी छोड़ जाती , खाना तो गंधर्व खा लेता लेकिन उस वस्त्र को हाथ भी नहीं लगाता , एक दिन दोपहर को जब छाया खाना देने आई तब गंधर्व ने उसे कहा कि रुको ,
छाया : बोलिए क्या हुक्म है ,

गंधर्व : तुम क्यों मेरे लिए रोज खाना लेकर आती हो ,

छाया : क्यों की मै पृथ्वी की रहवासी हूं ओर हम पृथ्वी रहवासी किसी को भूखा नहीं रहने देते , 

गंधर्व : ( हस्ते हुए ) अच्छा ऐसी बात है , 

छाया : बिलकुल ,

गंधर्व  : तुम्हे पता है , हमारे स्वर्ग मै कितनी प्रकार के भोजन होते है , 

छाया : अच्छा , फिर तो तुम्हे मेरा बनाया हुआ खाना तो बिलकुल पसंद नहीं होगा , 

गंधर्व :  मैंने एशा तो नहीं कहा , तुम्हारा खाना भी अच्छा है ,

छाया : तुमने क्या किया था जो तुम्हे यहां आना पड़ा ,

गंधर्व : मै स्वर्ग की सारी अप्सरा के साथ यूहीं घूम रहा था , घूमते घूमते अचानक हम पृथ्वी की सीमा पर आ पहोचे , ओर यह करना हमारे वहा अपराध है , 

छाया : स्वर्ग की अप्सरा ! 

गंधर्व : हा तो , तुम इतना आचार्य के साथ क्यों बोल रही हो , 

छाया : कुछ नहीं , बस यूंही  अच्छा यह बताओ कि वहा पर तुम्हारा कोन कोन है, 

गंधर्व : मेरे मम्मी पापा और सारी अप्सरा ,

छाया : तुम तो ऐसे बोल रहे हो कि तुम कनैया हो ओर वह सारी अप्सरा तुम्हारी गोपिया है, 

गंधर्व : हा ! तो ,

               
छाया  मन से तो जानती थी कि अप्सरा गंधर्व की दीवानी होगी लेकिन यूहीं उनको छेड़छाड़ के लिए उसके साथ यूहीं बातो बातो मै उसकी टांग खिज रही थी , बहुत देर तक बात करते रहे दोनों , छाया की नजर बार बार गंधर्व को देख रही थी , उनकी आंखो में छुपा अपार प्रेम गंधर्व के दिमाग के परे था , यूहीं बातो बातो मै दोनो बहुत करीब आ गए , अब छाया रोज खाना लेकर जाती ओर उनके साथ बहुत बाते करती , अब महीना बीतने आया था , जैसे जैसे दिन बीत रहे थे छाया उदास हो रही थी और गंधर्व खुशी का पार नहीं था , एक दिन गंधर्व ने छाया को अपने पास बिठाया ओर कहा की ,

गंधर्व : छाया कल मेरा एक महीना पूरा होने वाला है , ( बहुत खुश होकर कहा ) 
कल मुझे लेने स्वर्ग से विमान आयेगा , 

छाया : अच्छा है , ( नमी आंखो के साथ ) मतलब कल तुमहे इस पृथ्वी से छुटकारा मिल जाएगा , केसा रहा तुम्हारा अनुभव यह का ,

गंधर्व : बहुत अच्छा सिर्फ तुम्हारी वजह से , अगर तुम नहीं होती तो पता नहीं मै कहा जाता , 

छाया : वहा जाकर सब भूल तो नहीं  जावोगे  ?

गंधर्व : बिलकुल नहीं ,

            
कुछ देर बाते करके छाया अपने घर की ओर जाने लगी उसके पैर जमीन से उठ नहीं रहे थे मानो उसके पैरो तले जमीन खीस गई हो , वह घर गई और चुप चुप के बहुत रोई , छाया को गंधर्व से बहुत लगाव हो गया था इतना मानो की उसे लग रहा था कि उसकी सांसे बंद हो रही है , पूरी रात छाया जगी ओर गंधर्व के लिए भात भात के भोजन बनाए ओर रोज की तरह एक बहुत ही अच्छा छाल का वस्त्र बनाया , 

पूरी रात जितनी हो सकते उतनी मीनाकारी उसने उस वस्त्र पर करी यह जानते हुवे भी की वह इसे पहनेगा भी नहीं , सुबह हुई वह रोज की तरह गंधर्व के पास गई और उसे खाना खिलाया और वह वस्त्र वहा रखकर बिना कुछ बोले वहा से निकल गई , गंधर्व भी खुशी के से पागल था इसलिए कुछ नहीं बोला , 

             
छाया के जाने के बाद गंधर्व का ध्यान उस अनमोल खाने पर गया ओर रंगबिरंगे छाल के वस्त्र पर गया , उसने सोचा कि एकबार वह छाया से मिले ओर उसका धन्यवाद करे , यह सोचकर वह छाया के घर की और चला वहा जाकर उसने घर के बाहर से छाया को पुकारा छाया..... छाया.......छाया...... बहुत बार पुकारने के  बाद वह घर की अंदर गया , वहा जाकर उसने ऐसा कुछ देखा जिसे देखकर मानो उसकी सांसे रुक गई हो , 

दादाजी छाया को छाती से लगाकर जोर जोर से रो रहे थे , गंधर्व ने धीरे धीरे से अपने कदम बढ़ाए , छाया के पास जाकर उसने दादाजी से पूछ की क्या हुआ , दादाजी कुछ नहीं बोल पाए , गंधर्व ने छाया को अपनी गोद में लिया और देखा ली छाया की सांसे रुक गई थी इतना देखते ही उसने छाया को जट से अपनी बाहों मै ले लिया , ओर रोने लगा ,  

                   ढलती रात का एक मुसाफिर ,

                   सुबह अलविदा कह चला ,

                   जीते जी तेरा हो सका ना ,

                   मर के हक अदा कर चला , 

               
जिते जी छाया गंधर्व की ना हो पाई लेकीन मरते ही गंधर्व पर अपना हक जता कर दुनिया छोड़ कर चली गई , स्वर्ग से आया हुआ विमान वापस चला गया , गंधर्व ने अपनी सारी जिंदगी उस झोपड़ी मै गुजारी वह भी उस छाल के वस्त्र के साथ , 

बस यही थी मेरी जिंदगी में आज की  कहानी...

3 टिप्‍पणियां:

  1. bhaijaan story to bahot lajwab hay...
    10th class main gujrati book main ye unit padhai main aata tha

    gandharva ek gavaiyaa tha....ganewala

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  2. Thank you so much brother,
    Mene bohot dhundha tha is chapter ko , but nahi mila , aaj talash puri hui meri, ye meri one of the best favourite love stories mese ek he ,
    thank you so much .

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