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रविवार, 20 मई 2018

power of subconscious mind , जागृत मन की शक्ति पहचाने जरूर ,

Mind power : A blog about about the power of subconscious mind , different between subconscious and unconscious mind , How to change our mind for all work is saccess


  power of subconscious mind
Mind power


Mind power

आज मैं आप सबको हमारे माइंड के बारे में कुछ ऐसी बातें बताना चाहता हूं जिसे सुनकर शायद आप अपने लाइफ में कुछ बन पाओगे अगर आपने मेरा यह ब्लॉग दिल से पढ़कर इस ए फॉलो करेंगे तो आप डेफिनेटली अपने लाइफ में कुछ बुरी आदत को छोड़ने में कामयाब हो जाओगे अगर आपको मेरा ब्लॉक पसंद आया तो प्लीज़ शेयर जरूर कीजिए ताकि और लोग भी अपनी लाइफ में कुछ चेंजेस कर पाए ,फिर चलिए शुरू करते है ,

     
जैसे की आप सब जानते हैं हमारे पास एक सबकॉन्शस माइंड और एक उनकॉन्शस माइंड होता है , एक को जागृत मन और दूसरे को अर्ध जागृत मन कहते हैं  एक्सउल्ल में  कुछ ऐसा है दोस्तों जब भी आप अपने माइंड में कुछ सोचते  उस वक्त हमारे दोनों माइंड हमें कमांड करते हैं जिसमें से अर्ध जागृत मन हमें नेगेटिव ऑप्शन यानी कि बुरे ख्याल देने शुरू कर देते हैं और पॉजिटिव मन हमें अच्छे ख्याल देना शुरु कर देता है ,
             
फॉर example जब आप सोचेंगे मुझे स्टडी करनी है तब हमारा उनकॉन्शस माइंड   हमें सजेस्ट करता है कि अभी नहीं थोड़ी देर बाद में पढ़ लेना अभी TV देखो गेम खेलो एक्सस्ट्रा , उसी वक्त हमारा जो  सबकॉन्शस माइंड  कुछ नहीं है चुपचाप रहता है कोई सजेशन नहीं देता है इसलिए आप अपने  उनकॉन्शस माइंड  की बात में आ जाते हो और वही करते हो जो उसे पसंद है ,

सच कहु तो दोस्तों हमारा देश तो आजाद हो गया है लेकिन हम आज भी गुलाम है जानते हो हम किसकेे गुलाम है हम हमारे उनकॉन्शस माइंड के गुलाम है जो जब चाहे जैसे चाहे हमें कुछ भी करवा सकता है गेम खेलो TV देखो यह सब कुछ आपको पसंद नहीं है दोस्तों यह सब कुछ हमारे मालिक को पसंद है जिसके हम आज भी गुलाम हैं , जब तक हम उसके गुलामी से नहीं छूटे तक हम अपनी लाइफ में कुछ नहीं कर पाएंगे और यह बात ११०% सही है दोस्तों अगर आपको यकीन नहीं हो रहा है तो सोच कर देखें ,

   Power or subconscious mind ,

Mind Power हिंदी
Power of subconscious mind

आज के इस दौर में सब का सबकॉन्शस माइंड बंद है आज हर इंसान अपने अन कॉन्शियस माइंड का गुलाम है लेकिन हर कोई कोई गुलाम नहीं होता कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी मेहनत और लगन से अपने अनकॉन्शियस को चुप कर देते हैं और अपने लाइफ अपनी मर्जी से जीते हैं अब आप सब लोग सोचोगे कि अपनेअन कॉन्शियस माइंड  को काबू कैसे करें क्या ऐसा हो सकता है जी हां दोस्तों ऐसा बिल्कुल हो सकता है लेकिन उसके लिए आपको थोड़ी सी मेहनत करनी पड़ेगी जो बिल्कुल आसान है उसके  इंसान के लिए जो इस गुलामी से सच में जुड़ना चाहते हैं बस कुछ ऐसे टिप्स है जिसे फॉलो करके ही आप अपने आप के मालिक हो जाओगे
       
क्यों की , लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती यह सेंटेंसेस बिल्कुल सच  है इसलिए सबसे पहले आपको अपने दिमाग में इस कहावत को ठीक से बिठा देना है और कल करे सो आज कर आज करे सो अभी इस को फॉलो किया तो आप डेफिनेटली अपनी लाइफ में के डिसीजन खुद ले पाओगे जैसे कि मैंने आपको बताया कोई भी ख्याल आपके दिमाग में आए तब इतना करो कि कुछ भी मत सोचो अगर आप सोचने लगे तो जो भी जवाब आएगा वह समझ लो आप के मालिक का आदेश है लेकिन अगर आपने बिना सोचे ही बुक्स हाथ में ले ली फिर देखना कैसे एक के बाद एक चैप्टर चुटकी में फिनिश्ड हो जाएगा ,

हर कोई कहता है कि कोई भी काम करने से पहले सोचो लेकिन मैं आप से कहता हूं कि मत सोचो अगर सोचने लगे तो आप काम नहीं कर पाओगे लेकिन एक बात का ध्यान रहे कि अपनी लाइफ के डिसीजन लेते वक्त सोचना बहुत जरुरी है लेकिन अगर आपकी लाइफ आपकी नहीं हुई तो क्या सोचना इसलिए अपनी लाइफ को खुद की बनाओ और फिर सोचा करो जितना सोचना है कुछ ऐसी बातें हैं जो मैंने महसूस किया है कि कैसे अन कॉन्शियस माइंड को हमेशा के लिए चुप कर करे एसा तो दोस्तों करने करना कुछ नहीं है बस कुछ बातों का ध्यान से सुनिए कुछ टॉपिक जो मैं आपको बताना चाहता हूं ,
         

How to change your brain

 1) सब की प्रॉब्लम होती है कि सुबह जल्दी कैसे उठे लेकिन कभी जल्दी उठा नहीं जााता है तो आपको करना है यह है कि सुबह का अलार्म जब बजेगा तब आप उठेंगे और सोचने लगेंगे कि थोड़ी देर सो लेता हूं उसी वक्त आप अपनी सोच को ब्रेक देंना है और उठ जाना है  ,        
     
 2) दूसरी बात कि अपनी लाइफ को टाइम टेबल के हिसाब से मेंटेन कीजिए जब समय हुआ स्टडी का तब सोचना नहीं है बस अपनी बुक्स को खोलकर पढ़ाई करनी है जब समय  खेलने का तब भी अपनी बुक्स की ओर नहीं देखना है सीधा खेलने चला जाना है ,

 3) साइंस कहता है दोस्तों और मैं भी कहता हूं क्योंकि मैं भी साइंस का स्टूडेंट हूं कि अगर कोई इंसान 21 दिन तक कोई काम रेगुलरली करता है तो 22 में दिन व उनकी आदत बन जाती है और दोस्तों जब वह आपके आदत बन जाती हैं तब उसे कोई नहीं बदल सकता यहां तक कि हमारा उनकॉन्शस माइंड भी नहीं ,

4) सिंपल सी बात है दोस्तों 21 दिन तक अपने अंकों सेल्समैन को कहो कि अपनी सोच अपने पास रखो मैं अपनी लाइफ अपनी मर्जी से जी सकता हूं फिर देखना दोस्तों आप एक सक्सेसफुल इंसान होगे मेरा दावा है आपसे ,
       
5) यह बात तो आपको भी पता है कि बुरा काम करने वाले लोगों को कोई भी बुलाता नहीं है इसलिए वह हमेशा चुप ही रहते हैं इसी तरह अगर आपने अपने अन कॉन्शियस माइंड को कुछ दिन नहीं चलने दिया वह भी चुपचाप किसी कोने में बैठा रहेगा और कमेंट देना ही भूल जाएगा ,

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