यह ब्लॉग खोजें

बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

फ़रवरी 20, 2019

हमारी किंमत हमेशा बदलती रहती है Our price always changes

हमारी किंमत हमेशा बदलती रहती है Our price always changes


मैं अपने सारे friends के साथ every Sunday घूमने जाता हूं और sunday इसलिए घूमने जाता हूं because उस दिन हमारे यहां एक बहुत बड़ा कपड़ों का fair लगता है Which we call something else, 

मैं उस कपड़ों के fair में अपने दोस्तों के साथ निकलता हूं तब आते-आते अपने लिए कुछ ना कुछ Fruit खाने के लिए जरूर लाता हूं और मैं ही नहीं मेरे सारे friends भी अपने अपने लिए कुछ ना कुछ लाते ही है ,

वैसे भी सब के पास time सिर्फ sunday को होता है इसके अलावा तो now-a-days का हर इंसान busy रहता है और आज कल का तो atmosphere ऐसा है कि अगर कोई भी किसी से कुछ भी पूछता है ना तो सामने वाले से भी यही reply आता है कि I'm busy now

one time मैंने किसी से पूछा कि यार लोग हमेशा ऐसा क्यों कहते हैं कि मैं busy हूं , तो पता है सामने वाले ने मुझे क्या जवाब दिया , उसने कहा कि अभी मैं busy हूं बाद में बताता हूं मतलब यहां पर भी लोग बिजी ही है , 

always care your price 

हमारी किंमत हमेशा बदलती रहती है Our price always changes
हमारी किंमत हमेशा बदलती रहती है Our price always changes



वैसे हमारा मुद्दा कुछ और है मैं बात करना चाहता हूं एक वक्त कि जब हम लोग ऐसे ही एक sunday bazaar में घूमने निकले और bazaar में घूमने के बाद हम लोग Fruit की दुकान पर गए और सब लोगों ने अपने लिए कुछ ना कुछ Fruit लिए और मैंने अपने लिए grape यानी की अंगुर लेने का सोचा , 

जब मैं अंगूर लेने के लिए एक shop पर गया और मैंने अंगूर का भाव Shopkeeper से पूछा तो उसने मुझे दो तरह के अंगूर बताएं . एक वो अंगूर जो चिपके हुए थे जिसे हम लूम कहते हैं मतलब कि वह सारे अंगूर लूम में थे और दूसरे वह grape दिखाए जो अंगूर एक दूसरे से अलग हो चुके थे और बिखरे हुए थे ,

उसमें से जो लूम में लगे हुए थे उस अंगूर की कीमत ₹30 किलो और दूसरे अंगूर जो बिखरे हुए थे उसकी कीमत ₹15 किलो क़ीमत मुझे उस Shopkeeper ने बताई , When i heard this, i drowned in a deep thought thinking “How"

हमेशा अपनी कीमत का ख्याल रखें

आज कल मुझे हर सवाल के जवाब खोजने की Habit हो गई है इसलिए इस सवाल का जवाब ढूंढे बिना मुझे चैन तो मिलने वाला नहीं था इसलिए मैंने सोचा कि खुद से सोचने से अच्छा है कि इस Shopkeeper से ही पूछ लेता हूं कि But why so ,

मेरा जो यह सवाल पूछने का way था वह एकदम मजेदार था और उससे भी ज्यादा मजेदार था उस Shopkeeper का two words का वह जवाब , मेरे two line के सवाल और Shopkeeper के  two words के जवाब में मुझे और मेरे दोस्तों को सोचने पर मजबूर कर दिया ,

मैंने दुकानदार से कहा कि ऐसी क्या गलती हो गई इस बिखरे हुए अंगूर की जिसकी वजह से इसका दाम अपने बिरादरी के बाकी अंगूर से आधा हो गया , तब Shopkeeper ने कहा इनसे बस यही mistake हो गई कि यह उन सब से बिछड़ गए

इस बात को सुनकर आप लोगों को यह सीखने मिला होगा कि अपनों से बिछड़ने के बाद हमारी जो Value है वह आधी हो जाती है और आपकी यह सोच बिल्कुल सही है लेकिन मैं तो यहां अपनी सोच की बात लेकर बैठा हूं और इसीलिए मैं यहां पर अपनी सोच आपके सामने रखना चाहता हूं इस Incidence को लेकर ,

मेरा मानना है कि अपनों से बिछड़ने के बाद हमारी कीमत आधी नहीं बल्कि less मात्र हो जाती है मतलब कि हमारी कीमत रहती ही नहीं है और यह मेरा मानना है , क्या लगता है आपको सही है ना , 

सोमवार, 18 फ़रवरी 2019

फ़रवरी 18, 2019

Another learning source to success एक और सीखने लायक सफलता का सूत्र

Another learning source to success एक और सीखने लायक सफलता का सूत्र

Another learning source to success
Another learning source to success

जब sonu nigam जो बहुत ही popular singer है वह अपनी singing के career को स्टार्ट करने के लिए delhi से अपने father के साथ mumbai आए थे तब उसके पापा ने उसे एक बात कही थी जो बात आज मुझे पता चली है और मुझे लगा कि वह बात मुझे अपने आप से और आप से भी शेयर करनी चाहिए ,

मेरे ज्यादातर example singing  से जुड़े हुए होते और वह इसलिए क्योंकि मुझे singer और song दोनों ही बहुत पसंद है लेकिन फिलहाल हम बात करेंगे की सोनू निगम के पापा ने उसे ऐसा क्या कहा था जिसे सुनने के बाद सोनू निगम आज सोनू निगम के नाम से जाने जाते हैं ,

एक वक्त था जब सोनू निगम जागरण और शादी में गाना गाने के लिए ₹100 लेते थे और आज का वक्त है जहां पर पता नही वह कितने लाख लेते होगे आज हम उस ₹100 से लेकर लाखो तक के मंजर को हासिल करने तक के उस सफर की बात करेंगे ,

जो लोग यहां पर गुजराती होगे वह लोग शायद फरीदा मीर को जानते होगे , मैं यहां पर फरीदा मीर की बात इसलिए कर रहा हूं क्योंकि सोनू निगम और उसकी कहानी एक जैसी है और शायद कहीं ना कहीं यह कहानी हर उस इंसान से जुड़ी हुई है जो आज success है लेकिन उसकी स्ट्रगल एक जैसी है ,

फरीदा मीर जो गुजरात की सबसे प्रख्यात सिंगर है वह एक वक्त पर प्रख्यात नहीं थी तब वह अपने आस-पास के गांव में जाकर सबसे विनती करती थी कि आप मुझे अपने घर के किसी कार्य में गाना गाने के लिए जरूर  बुलाना और आज का वक्त है जब लोग उसे बुलाने लगे तब उसके पास इतने सारे ऑर्डर थे जिसकी गिनती करना  मुश्किल तो नहीं लेकिन कहीं ना कहीं काबिले तारीफ है ,

अभी मैं बात करना चाहता हूं उस दो लाइन की जो दो लाइन सोनू निगम के पापा ने उसे तब कही थी जब वह दोनों मुंबई आए थे , तब उसके पापा ने उसे कहा था कि , 

One of the best success formula


struggle now and live a comfortable life later otherwise now enjoy with life and struggle later

मतलब कि या तो तुम अभी संघर्ष कर लो और बाद में आनंददायक जिंदगी बिताओ या फिर तुम अभी आनंद उठाओ और बाद में संघर्ष करते रहो यह फैसला तुम्हारे हाथ में है ,और उस वक्त सोनू निगम ने जो फैसला लिया था वह फैसला मुझे आप को और अपने आप को बताने की जरूरत नहीं है , 

यही बात उस हर इंसान पर अप्लाई होती है जो इंसान आज सक्सेस है और जो इंसान आज अनसक्सेसफुल है और जिस इंसान ने अपने पहले वक्त पर संघर्ष किया वह आज इंजॉय कर रहे हैं और अनसक्सेसफुल इंसान ने पहले वक्त इंजॉय किया और आज शायद वो संघर्ष कर रहे हैं बाकी का तो हर इंसान अपना अपना जानता है ,


शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

फ़रवरी 16, 2019

Do not think that I know all || ऐसा मत सोचो कि मैं सब जानता हूं!

Do not think that I know all || ऐसा मत सोचो कि मैं सब जानता हूं !

Do not think that I know all
Do not think that I know all


सब लोग कहते हैं कि जो लोग law की पढ़ाई करते हैं उसे बहुत ज्यादा पढ़ना पड़ता है शायद इसीलिए हमारे जो महान व्यक्ति  Dr br ambedkar वह 16 ,16 घंटे तक पढ़ाई करते थे लेकिन बात यह है कि लोग यह क्यों नहीं कहते कि जो लोग law की पढ़ाई करते है वह इतनी देर तक पढ़ते क्यों है ,

उसकी study कभी भी complite क्यों नहीं होती , चाहे वह student हो या फिर बहुत बड़ी कंपनी में जॉब कर रहे हो , फिर भी उसे पढ़ना तो पड़ता ही है , यह question मुझे बार-बार परेशान करता था इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना इसके ऊपर थोड़ा सा रिसर्च करू और जो मुझसे बन पड़ता है उतना नॉलेज इकट्ठा करने की कोशिश करू , 

इसका जवाब मुझे तब मिला जब मैंने एक गुजराती movie देखी जिसका नाम है चलो थोड़ा सा जी लेते हैं , नाम मैंने यहां पर हिंदी में लिखा है लेकिन गुजराती में इसका अर्थ कुछ और ही होता है और वह सिर्फ गुजराती लोग ही समझ सकते हैं इसलिए मैंने उस title को हिंदी में लिखकर यहां पर आपके सामने रखा ,

Do not think that I know all 


उस movie में एक dialogue था कि “हर गुजराती के पास सब सवाल के जवाब होते हैं सारी परेशानियों का हल होता है लेकिन शर्त सिर्फ इतनी होनी जाएगी की वह सारी परेशानियां वह सारे सवाल दूसरों के होने चाहिए "मतलब कि लोग खुद के सवाल और खुद की परेशानियों का हल खोजें बिना दूसरों की परेशानियों में घुस जाते हैं ,

और इसके पीछे का एक ही reason है और वह reason मेरे इस ब्लॉग का टाइटल   है यानी की हम यह सोचने लग जाते हैं कि “हमें सब पता है"  This is the reason for which we can never learn new

दोस्तों दूसरों की बात नहीं करते हैं मैं खुद की और आपकी बात करता हूं कि जब भी कोई इंसान मेरे पास आकर मुझसे कुछ कहता है या फिर कोई छोटी सी knowledge share  करना चाहता है तो मैं उसका मुंह सटाक से बंद कर दूंगा और उसे कहूंगा कि मुझे यह बताने की जरूरत नहीं है “मुझे सब पता है" 

जैसे कि Everyone knows कि मैं यहां पर अपनी बातें शेयर करता हूं जो मेरी सोच है वह आपके सामने रखता हूं इसलिए आज मेरी सोच में थोड़ा सा बदला हुआ और मैंने सोचा कि क्यों ना कुछ सालों के लिए यह सोच कर चले कि मुझे कुछ पता नहीं है और इसके फायदे क्या है वह सोच कर ही मेरे दिमाग को इतना सुकून मिला , 

Benifit of this thinking


Just for example की आपने किसी पर्टिकुलर topic को study किया उसके बाद उसे छोड़ दिया beacase आपके ज़हन में आया कि अब आपको उस topic में सब कुछ पता है यानी कि आपकी पकड़ अब उस topic को लेकर storng है , इसी वजह से कोई इंसान आपको उस topic को दुबारा पढ़ाने की कोशिश करेगा या फिर आपके सामने उसके realate कोई knowledge share करना चाहेगा तो आप सटाक से कहेंगे कि मुझे पता है ,

लेकिन उस वक्त कुछ देर के लिए आप यह सोचे कि आप को उस topic के ऊपर कुछ भी पता नहीं और जो कुछ भी वह इंसान बोलना चाहता है उसे visualization और mind के साथ इस तरह से सुने जैसे कि आपको वह सब पहली बार सुनने मिल रहा है और सुनने के बाद कहीं सुनसान जगह पर या फिर रात को सोने से पहले उस बात को anyalisis करें कि क्या उस बात को सुनकर आपको कुछ नया सीखने नहीं मिला, 

after the doing all this यहां पर कोई शख्स ऐसा नहीं होगा जो मुझे यह कह सके कि , नहीं मुझे उसमें से कुछ सीखने नहीं मिला क्योंकि मेरा 500% believe है कि इससे आपको कुछ ना कुछ नया सीखने positively मिला होगा, 

जो people law की study करते हैं उसके दिमाग में भी यही घुस गया है की उसे कुछ पता नही है उसने अगर कोई Case खुदकी बदौलत भी solve किया है फिर भी वह उस case के related बहुत सारी book's पढ़ते रहते हैं क्योंकि उसके दिमाग में घुस गया है कि उसे इस case पर कुछ नहीं पता तभी जाकर वह उस case की study बार-बार करते हैं और बार बार कुछ नया सीखने का अनुभव करते है इसी वजह से उसकी स्टडी और उसकी पढ़ाई लिखाई कभी खत्म नहीं होती , 

आज से नही लेकिन अभी से यह सोचना शुरू कर दीजिए की आपको कुछ पता नहीं है और तब तक यह सोचना शुरू रखे जब तक आपको ऐसा नहीं लगता कि जब आप लोगों के सामने आपकी बाते रखेगे तब सच में आपको सब पता होगा , लेकिन हां तब भी आप यह मत सोचना कि आप को सब पता है लोग भले ही यह सोचने लगे ,कि आप को सब पता है ,  बस यही बात आज मुझे अपने आप से और मेरे सारे दोस्तों के साथ शेयर करनी थी और Especially  तो मुझे अपने आप से share करनी थी ,

गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019

फ़रवरी 14, 2019

Online study karte waqt मोबाइल se कैसे bachaye अपनी आंखें

Online study karte waqt मोबाइल se कैसे bachaye अपनी आंखें

Online study karte waqt मोबाइल se कैसे bachaye अपनी आंखें
Online study karte waqt मोबाइल se कैसे bachaye अपनी आंखें

में हर रोज तकरीबन 10 या 12 घंटे मोबाइल और कंप्यूटर के साथ चिपका रहता हूं because मेरा काम ही यहां पर होता है , 4/5 घंटे ब्लॉग लिखने के लिए ऑनलाइन होना पड़ता है औऱ बाकी का वक़्त study करने के लिए ,

में जानता हूं कि में अपनी study बुक्स के साथ भी कर सकता हु लेकिन मेरी एक आदत है पता नही उसे हम bad habbit कहेगे या good habbit , और वह आदत यह है कि मुझे knowledge की भूख है लेकिन मुझे book's पढ़ना अच्छा नही लगता क्यों कि उसमें में वह सब नही सिख सकता जो में सीखना चाहता हु ,

Internet से हम जो चाहे वह अपने मुड़ के हिसाब से सिख सकते है और इसलिए में अपनी पूरी study मोबाइल से करता हु लेकिन इसका मतलब यह नही है की आपको अगर बुक्स पढ़ने की आदत है तो उसे छोड़कर मोबाइल को अपनाए , मोबाइल हमारी body को बहुत नुकसान करता है और वह तो आप जानते ही होंगे ,


How to protect eyes from mobile 


मैं आज आपके साथ Mobile से जुड़ी एक बात share करने आया हूं , जैसे कि हम सब जानते हैं कि mobile हमारी body को बहुत नुकसान करता है लेकिन हमारी बॉडी का एक अंग जो मोबाइल की वजह से डैमेज होता जा रहा है , उसे हम कुछ हद तक काबू में कर सकते हैं और उनका नाम है हमारी आंखें ,

मैं बहुत दिनों से सोच रहा था कि अपनी आंखों को कैसे मोबाइल से बचाऊ और इसके लिए मैं डॉक्टर के पास गया , यह पूछने की क्या आपके पास कोई ऐसा नुस्खा है जिससे में मोबाइल उस करते वक्त अपनी आंखों की रक्षा कर सकू और उसने मुझे एक गॉगल्स दिए , लेकिन मुझे वह पसंद नहीं आया इसलिए मैंने वह पहनना छोड़ दिया ,

बहुत दिनों की खोज के बाद finally मुझे एक बहुत important बात पता चली जो शायद सब जानते ही होंगे लेकिन दो वजह से में वह बात यहां share रहा हु ,

पहली वजह यह कि मेरे इस ब्लॉग का title यही है कि जो में सीखता हु उसे हमेशा के लिए save रख सकू और आज मैंने यही topic सीखा है , second think यह है कि भले ही मैंने पहले लिखा है कि इस बात को सब जानते होंगे लेकिन फिर भी बहुत सारे ऐसे peipeo भी जरूर होंगे जिसे यह बात नही पता होगी ,

में जब nights में phone use करता था तब मुझे ऐसा लगता था कि मुझे काम की वजह से नींद नही आ रही है लेकिन बात तो कुछ और थी ,

थोड़ी रिसर्स के बाद पता चला कि हमारे दिमाग ने दिन और रात को पहचानने के लिए भी code फिक्स किये है यानी कि सुबह जब सूरज निकलता है तब blue रंग की किरणें हमारी आँखों मे पड़ती है जिससे हमारे दिमाग को पता चलता है कि दिन हुआ है और जैसे ही शाम होने लगती है वैसे आकाश में blue किरणे कम होने की वजह से हमारी body में  melatonin  नाम का हॉर्मोन उत्पन्न होता है जो हमे संकेत देता है कि रात हो गई 

लेकिन रात को जब हम देर रात तक phone use करते है तब mobile में से निकलती blue लाइट की वजह से हमारे दिमाग़ को लगता है कि रात है इसलिए मुझे रात को नींद नही आती थी और में समझता था कि मुझपे काम का बुखार है , अब इनके solution की बात करे तो simple है ,

आज कल जो new mobile और लैपटॉप कंप्यूटर है उसमें तो blue फ़िल्टर का बटन आता है लेकिन जिसमे नही आता है वह सब मेरी तरह playstore में से blue फ़िल्टर app डाऊनलोड करले , इतनी बड़ी problem का यही एक छोटा सा हल है , जो लोग रात को देर रात तक mobile में work करते है वह जरूर इसे आजमाए , 


मंगलवार, 12 फ़रवरी 2019

फ़रवरी 12, 2019

लोग वही समझते हैं जो वो समझना चाहते हैं Mysterious truth of earth


लोग वही समझते हैं जो वो समझना चाहते हैं Mysterious truth of earth

ग वही समझते हैं जो वो समझना चाहते हैं Mysterious truth of earth
Mysterious truth of earth

आज मैं poetry पढ़ रहा था उस poetry की चार लाइन बहुत ही सुंदर थी , उस चार लाइन में मुझे बहुत कुछ सीखने मिला , जब मैंने वह poetry पढ़कर नीचे comments box को देखा तो मैंने वहां पर कुछ ऐसा पढ़ा की मैं सोचता रह गया और शायद आप भी सोचते रह जायेगे , 

सबसे पहले मैं आपको वह four beautiful lines बताता हूं और उससे मुझे क्या सीखने मिला है वह बताता हूं , उसके बाद हम उस महान व्यक्ति की बात करेंगे जिस ने comments box में कुछ ऐसा लिखा जिसे पढ़कर में अभी तक हंस रहा हु और न जाने कब तक मेरी हंसी यूं ही बरकरार रहेगी , 


Mysterious truth of earth about people

जो poetry में पढ़ रहा था वह poetry लिखने वाले ने सबसे पहले मेंशन किया था कि वह पोएट्री का रियल ऑथर शैलेश लोढ़ा है जो तारक मेहता के नाम से पहचाने जाते हैं सबसे पहले मैं आपको वह four line बताता हूं जो मैंने वहां पर पढ़ी थी वह लाइन्स कुछ इस प्रकार थी कि , 


मैंने एक Parrot पाला कुछ days बाद वह उड़ गया ,
मैंने एक Bird पाली वह भी कुछ दिन बाद उड़ गए ,
उसके बाद मैंने एक वृक्ष बोया ,
Parrot भी वापस आ गया और Bird भी वापस आ गए ,

इस line से मुझे इतना सीखने मिला कि मुझे किसी भी बात की जड़ तक जाना चाहिए तभी मुझे सही answer मिलता है और मेरा हर काम success के साथ होता है वरना में भी विफ़ल होता रहुगा , और भी unique मुझे इसमें से  सीखने मिल सकता है लेकिन I have not tried

आप चाहे तो try कर सकते है और जो आप learn करते है वह मुझे भी जरूर बताना beacaub में भी सीखने का शौकीन हु , अब में आपको वह अनमोल line लिखकर सुनाता हु तो वह चंद line  कुछ इस तरह की थी गौर फरमाएगा दोस्तों ,


मैं बीकानेरी भुजिया लाया मेरा दोस्त रवि ले गया ,
मैं मंचूरियन राइस लेकर आया मेरा दोस्त जिग्नेश ले गया ,
उसके बाद में बोतल लेकर आया ,
रवि भी वापस आ गया और जिग्नेश भी वापस आ गया , 

इसी लिए दोस्तो मैंने अपने इस ब्लॉग का title रखा लोग वही समझते हैं जो वो समझना चाहते हैं , वैसे मेरा यह blog थोड़ा सा joks types था लेकिन फिर भी आपको कुछ learn करने जरूर मिला होगा ऐसी आशा के साथ फिर मिलते है एक नए blog के साथ , 



रविवार, 10 फ़रवरी 2019

फ़रवरी 10, 2019

सब कुछ छोड़ जाने को ~ poetry in hindi


सब कुछ छोड़ जाने को ~ poetry in hindi 

सब कुछ छोड़ जाने को ~ poetry in hindi
सब कुछ छोड़ जाने को ~ poetry in hindi 

पता नहीं क्यों दिल कहता है

रिश्ते नाते सब से तोड़ जाने को
सुने हुए सारे कड़वे लब्ज भूल कर ,
एक नई उम्मीद के साथ दिल कहता है
सब कुछ छोड़ जाने को ,

एहसास नहीं है इस रास्ते का अंजाम
फिर भी आज दिल कहता है ,
सब कुछ छोड़ जाने को ,


Poetry for Bitterness


सचमुच गिला नहीं है मुझे अपनों से ,
गिला है मुझे गैरों की आदतों से ,
उनकी दिल जलाने वाली बातों को
सुनकर दिल बार बार कहता है

ऐसा नहीं है कि मैं कोशिश नहीं करता
आदतों में ढलने के लिए , फिर भी
एक वक्त के बाद दिल फिर कहता है
सब कुछ छोड़ जाने को ,

जानता हूं इन बातों से शिकवा नहीं करते
मगर काश यह बात दिल भी जान लेता
तब शायद दिल नहीं कहता
सब कुछ छोड़ जाने को ,


शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

फ़रवरी 08, 2019

बूढ़े मां-बाप और लकड़ी का कटोरा Short motivational story

Motivational story : one of the best motivational story for all son , this motivational story about the old parents ,

बूढ़े मां-बाप और लकड़ी का कटोरा Short motivational story 

बूढ़े मां-बाप और लकड़ी का कटोरा Short motivational story
बूढ़े मां-बाप और लकड़ी का कटोरा Short motivational story 


आंगन में लगा वृक्ष बूढ़ा भी हो ,


कोई उसे काटता नहीं है ,


क्योंकि वह फल बेशक न देता हो ,


लेकिन छाव तो हमेशा देता है 

अंदाजीत सब family में आज एक सिस्टम चल रहा है , पैरेंट्स बच्चों को बड़ा करते है उसकी शादी करवा कर उसको खुद पर depend होना सिखाते है जब वह खुद पर depend हो जाता है तब पैरेंट्स अपने रास्ते और बच्चे अपने रास्ते , 

लेकिन क्या करे दोस्तों , दो मौड़ जिंदगी में ऐसे होते है जहां पर हर किसी को किसी पर depend होना पड़ता है और वहाँ पर दूसरा या तीसरा ऑप्शन भी नही होता है और वह मौड़ है childhood और Old age , 

सब पैरेंट्स अपने बच्चों का सहारा बनते है लेकिन पता नही क्यों सब बच्चे अपने पैरेंट्स का सहारा क्यों नही बनते , कभी कभी सोंचता हु की कही इसमे भी हमारे यूनिवर्सल साइंस का कोई साइंटिफिक फार्मूला तो नही है , अच्छा होता लेकिन अभी में आपके साथ एक कहानी शेयर करने आया हु फ़िलाल उसकी बात करते है  ,

Motivational Short story


यही situation थी इसी प्रकार एक parents old हो गए थे जो चाहते थे कि उनका बड़ा बेटा जो दूर कहीं रहता था वह उसको सहारा दे क्योंकि वह अब खुद पर depend नहीं हो सकते थे वह बहुत ही Weak हो गए थे , और mostly parents अपने बच्चों को तब तक कष्ट नहीं देते जब तक वह खुद अपनी देखभाल ना कर सके ,

जब वह दोनों अपने बेटे के घर उसके साथ रहने जाते हैं तब उसको बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और सबसे ज्यादा परेशानी उसे खाने के टेबल पर होती है क्योंकि बहुत ही weak थे जिसके कारण वह ठीक से खाना नही खा पाते थे और उसकी यही आदत से उसके बेटे और बहू को चिढ़ होती थी , 

Some times उनके हाथ से juice का glass फिसल जाता तो कभी-कभी उनके मुंह से चावल के दाने गिर जाते , इसलिए बहू और बेटे ने कुछ दिन यह सब कुछ face किया उसके बाद उन दोनों का खाना उसके room में एक लकड़ी के कटोरे में भेजना शुरू कर दिया ,

जब एक parents अपने एक या 2 साल के बच्चे को खाना खिला रहे होते हैं तब उस बच्चे का मुंह पूरा भरा हुआ होता है उनकी चारों ओर खाना गिरा हुआ होता है लेकिन फिर भी parents को उसकी इस hebbit पर गुस्सा नहीं आता बल्कि उसे खुशी होती है लेकिन वही समय बदलता है जब बच्चों का वक़्त आता है अपने parents को खाना खिलाने का तब पता नहीं क्यों बच्चों को ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं ,

उस couple का एक 10 साल का बेटा था जो अपने घर मे हो रही इन बातों को नोटिस करता और अपनी बिरादरी वाला काम करता यानी कि बच्चों की जो hebbit है कुछ सीखने की वही सीखने का प्रयास करता , और फिर suddenly उसने ऐसा सीख लिया जो वाकई Compliment के काबिल था , 

एक सुबह school जाने से पहले उस बच्चे ने अपना piggy bank तौड़ दिया , उसकी माँ ने पूछा कि क्यों तौड़ा तुमने , तब बच्चे ने कहा कि मुझे आप दोनों के लिए एक very सपेशल gift लेना है mother Happy

शाम को उस दंपती का son वापस आया तो माँ ने देखा कि उनके left हाथ मे वाकई अनमोल तोहफ़ा था उसका यह gift देखकर पिता ने पूछा कि बेटा यह क्या लेकर आये हो तब बेटे ने कहा कि जब आप दोनों भी Old age चले जाएगी तब में आपको इसी लकड़ी के कटोरे में खाना दूँगा , 

Now what happened next is not known but we know that we have to stay away from this wooden bowl, then we have to remember this story , 

I always remember this क्यों कि मैंने बड़ी महेनत करके यह ब्लॉग without copyright  के आप तक पहोचाने में और गूगल में पूरी जिंदगी index रखने के लिए शब्दों के साथ बड़ा खिलवाड़ किया है , और आगे की some lines english में भी इसी लिए लिखी है , वरना सच friends मुझे कोई शोख नही है english लिखकर अपनी बेइज्जती करवाने का ,